पहले गऊ पूजन, फिर बजरंग बाण का पाठ; विद्या मठ में शंकराचार्य के ‘धर्म युद्ध’ का शंखनाद

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ प्रतिष्ठार्थ 'धर्म युद्ध' का शंखनाद कर दिया है. वाराणसी से गौ पूजन और बजरंग बाण पाठ के साथ यह यात्रा शुरू हुई है. लखनऊ में सभा की अनुमति न मिलने पर भी शंकराचार्य जौनपुर, सुल्तानपुर होते हुए रायबरेली जाएंगे. उन्होंने 'ज़िंदा हिन्दू लखनऊ चलो' का नारा दिया है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

भले ही में लखनऊ में सभा की अनुमति नहीं मिली, लेकिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गऊ प्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध शंखनाद कर दिया है. शंकराचार्य इसके लिए शनिवार की सुबह गौशाला में गोपूजन किया, फिर संकटमोचन मंदिर में बजरंग बाण का पाठ कर बजरंग बली और भगवान गणेश से यात्रा की अनुमति ली और लखनऊ के लिए रवाना हो गए.

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शंकराचार्य शनिवार की सुबह साढ़े आठ बजे विद्या मठ के गऊ शाला पहुंचे. वहां उन्होंने विधि विधान से गऊ माता की पूजा की. फिर चिंता मणि गणेश के दरबार में पहुंचे. यहां शंकराचार्य ने 15 मिनट तक पूजन किया और भगवान गणेश से अपनी यात्रा निविर्घ्न संपन्न कराने की कामना के साथ यात्रा की अनुमति ली. फिर सुबह 9 बजकर 05 मिनट पर वह संकट मोचन मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने बजरंग बाण का पाठ किया.

जौनपुर के लिए निकला काफिला

इसके बाद शंकराचार्य का काफिला 9:30 बजे लंका और डीएलडब्लू होते हुए फूलवरिया फोर लेन पर आया, जहां से बाबतपुर के रास्ते जौनपुर के लिए रवाना हो गया. शंकराचार्य के काफ़िले में उनके साथ उनके प्रमुख शिष्य मुकुंदानंद सहित 50 परिकर और 25 गाड़ियां हैं. चिंता मणि गणेश मंदिर में पूजन के बाद शंकराचार्य ने मीडिया से भी बातचीत की. उन्होंने कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि गऊ रक्षार्थ धर्म युद्ध करना पड़ रहा है और यात्रा निकालनी पड़ रही है.

रास्ते में सभा भी करेंगे शंकराचार्य

रास्ते में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद दोपहर में जौनपुर और फिर सुल्तानपुर में सभा को भी संबोधित करेंगे. इसके बाद वह शाम तक वह रायबरेली पहुंचेंगे. जहां उनका रात्रि विश्राम होगा. यहां उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य की यह गऊ रक्षा यात्रा आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से शुरू होकर शाम को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में विश्राम करेगी. शंकराचार्य ने इस यात्रा को ‘ज़िंदा हिन्दू लखनऊ चलो’ का नारा दिया है.