सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के मामलों में सख्त हुईं कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल

देवीपाटन मंडल में सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जे के मामलों को लेकर कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को ग्राम सभा, नजूल और नगर निकायों की जमीन से जुड़े लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कराने और न्यायालयों में प्रभावी पैरवी के निर्देश दिए. सरकारी जमीन पर संचालित विद्यालयों की जांच के लिए DIOS और BSA को निर्देश दिए गए हैं.

कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल Image Credit:

देवीपाटन मंडल में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के मामलों को लेकर कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने मंडल के सभी जिलाधिकारियों को ग्राम सभा, नजूल और नगर निकायों की सार्वजनिक भूमि से जुड़े लंबित मामलों का जल्द से जल्द निस्तारण कराने के निर्देश दिए हैं. कमिश्नर ने अधिकारियों से कहा है कि सरकारी जमीन से जुड़े जो मामले न्यायालयों में लंबित हैं, उनमें प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए, ताकि अनावश्यक रूप से जारी स्टे समाप्त कराए जा सकें और सार्वजनिक भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके.

कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देशों के बाद सरकारी जमीनों पर लंबे समय से चले आ रहे विवाद और कब्जों के मामलों की समीक्षा तेज होने की उम्मीद है. इसी क्रम में नगर पालिका परिषद गोण्डा की सार्वजनिक भूमि पर करीब तीन दशक से कथित अवैध कब्जे का मामला भी सामने आया है.

नजूल के भूखंड संख्या 514 से 525 तक कब्जे का आरोप

नगर पालिका परिषद गोण्डा की सार्वजनिक भूमि से जुड़े इस मामले में जानकारी के अनुसार नजूल भूखंड संख्या 514 से 525 तक की भूमि पर 1999 से कथित रूप से अवैध कब्जा बना हुआ है. मामला पुराना होने के कारण इस जमीन को लेकर कानूनी विवाद भी लंबे समय से चल रहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस भूमि से संबंधित वाद 1997 से सिविल न्यायालय में लंबित है.

विवाद के दौरान 2008 में सिविल जज (सीनियर डिवीजन), गोण्डा की अदालत से स्थगनादेश यानी स्टे जारी किया गया था. बताया गया है कि यह स्थगनादेश अभी भी प्रभावी है और मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है. ऐसे में सरकारी भूमि को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई और न्यायालय में चल रही प्रक्रिया दोनों महत्वपूर्ण हो गई हैं.

विवादित जमीन पर विद्यालय संचालित होने का आरोप

मामले में आरोप है कि जिस सरकारी भूमि को लेकर विवाद चल रहा है, उस पर एक विद्यालय का निर्माण कर उसका संचालन किया जा रहा है. इतना ही नहीं, विद्यालय को मान्यता भी प्राप्त होने की बात सामने आई है. यही वजह है कि मंडलायुक्त ने केवल जमीन से जुड़े राजस्व मामलों तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है, बल्कि सरकारी जमीन पर संचालित होने वाले विद्यालयों की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं.

कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों की जांच कराने को कहा है.

सरकारी जमीन पर स्कूल मिला तो होगी कार्रवाई

कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देश के मुताबिक जिलों में यह देखा जाएगा कि कहीं कोई विद्यालय सरकारी भूमि पर अनधिकृत रूप से तो संचालित नहीं हो रहा है. इसके अलावा विद्यालयों को मिली मान्यता की भी जांच की जाएगी. यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी विद्यालय का संचालन सरकारी जमीन पर अनधिकृत तरीके से किया जा रहा है या नियमों के विपरीत मान्यता हासिल की गई है, तो संबंधित विद्यालय के खिलाफ नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.

कोर्ट में लंबित मामलों की भी होगी निगरानी

कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने जिलाधिकारियों को सरकारी जमीन से जुड़े न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने को कहा है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों में सरकारी पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी होनी चाहिए. प्रशासन का प्रयास होना चाहिए कि यदि किसी मामले में अनावश्यक रूप से स्थगनादेश जारी है, तो उसे नियमानुसार समाप्त कराने के लिए न्यायालय के समक्ष प्रभावी तरीके से पक्ष रखा जाए.

इसका मकसद यह है कि केवल मुकदमा लंबित रहने की वजह से सरकारी और सार्वजनिक जमीन पर लंबे समय तक कब्जे की स्थिति बनी न रहे. हालांकि, जिन मामलों में न्यायालय का स्थगनादेश प्रभावी है, उनमें आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित आदेशों के अनुरूप ही होगी.

ग्राम सभा और नगर निकायों की जमीनों का होगा चिन्हांकन

मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने स्पष्ट किया है कि ग्राम सभा और नगर निकायों की सार्वजनिक भूमि का चिन्हांकन कर उसे अवैध कब्जों से मुक्त कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है. इसके लिए अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सरकारी और सार्वजनिक भूमि की स्थिति की समीक्षा करने तथा कब्जे से जुड़े मामलों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं. सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित भूमि किस श्रेणी की है, वर्तमान में उसका उपयोग किस प्रकार हो रहा है और उसके संबंध में कोई न्यायालयी विवाद या स्टे तो प्रभावी नहीं है.

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