36 साल की महिला को 10 साल से कैसे मिल रही वृद्धावस्था पेंशन? इटावा में बड़ा खुलासा
उत्तर प्रदेश के इटावा में एक चौंकाने वाला वृद्धावस्था पेंशन घोटाला सामने आया है. यहां एक 36 वर्षीय महिला ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 10 साल तक यह पेंशन ली. अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका पर जांच के आदेश दिए गए हैं. इस धांधली से सरकारी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
उत्तर प्रदेश के इटावा में एक हैरान करने वाली घटना हुई है. यहां एक 36 साल की महिला को 10 साल से वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी. मामले का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया. मामले की प्राथमिक जांच में पता चला है कि महिला ने ही फर्जी दस्तावेज लगाकर यह धांधली की है. चूंकि यह धांधली अधिकारियों कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकती. ऐसे में मामले की विधिवत जांच के आदेश दिए गए हैं.
मामला इआवा के बढ़पुरा ब्लॉक में ग्राम पंचायत विचारपुरा का है. जानकारी के मुताबिक यहां रहने वाली महिला उमा देवी पत्नी शिवराज सिंह की उम्र महज 36 साल है, लेकिन वह बीते 10 वर्षों से वृद्धावस्था पेंशन ले रहीं थी. मामला सामने आने के बाद सरकारी रिकॉर्ड खंगाले गए. इसमें पता चला कि 10 साल पहले जब उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन बनवाया, उस समय उनकी उम्र 26 थी. लेकिन उन्होंने कूट रचना कर 60 साल उम्र वाला फर्जी दस्तवेज जमा कर दिया.
उम्र में बड़ा अंतर
मामले में सबसे बड़ा सवाल महिला की वास्तविक उम्र को लेकर है. शिकायत के अनुसार उमा देवी की उम्र करीब 36 वर्ष है, जबकि पेंशन के लिए रिकॉर्ड में उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक दर्शाई गई. इसी आधार पर उन्हें वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिलता रहा. करीब 10 वर्षों तक यह मामला विभागीय रिकॉर्ड और सत्यापन प्रक्रिया के बीच चलता रहा. अब मामला सामने आने के बाद उनकी पेंशन रोक दी गई है और मामले की जांच हो रही है.
ऐसे हुआ खुलासा
ग्राम पंचायत विचारपुर के प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार के मुताबिक जानकारी होने पर उन्होंने जिलाधिकारी को शिकायत दिया था. इसके बाद 13 अगस्त 2026 को विभाग की ओर से बताया गया कि वर्ष 2024-25 के वार्षिक सत्यापन में महिला अपात्र पाई गई, जिसके बाद उसकी पेंशन बंद कर दी गई है. अब सवाल उठ रहा है कि यदि महिला वास्तव में 36 वर्ष की है तो बीते 10 वर्षों तक उसकी पात्रता की जांच कैसे होती रही.
रिकवरी पर विभाग का जवाब
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने आरोप लगाया कि महिला को लंबे समय तक मिली पेंशन की रकम की वापसी को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है. वहीं जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल ने कहा कि मामला सामने आने के बाद पेंशन रोक दी गई है. जांच के बाद नियमों के अनुसार रिकवरी भी होगी. बावजूद इसके पूरे विभागीय सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं.