नीरजा ने काटी थी पूंछ, 52 दिन तक चला इलाज… इटावा सफारी में शेरनी राधिका की मौत से शोक

इटावा सफारी पार्क में शेरनी राधिका की 52 दिन के उपचार के बाद मौत हो गई. नीरजा द्वारा पूंछ काटे जाने के बाद वह बीमार चल रही थी. 2019 में गुजरात से लाई गई राधिका लगभग 9 साल की थी और वह कभी मां नहीं बनी. शेरनी राधिका की मौत से सफारी पार्क में शोक है.

इटावा सफारी पार्क में शेरनी राधिका का निधन

इटावा सफारी पार्क में करीब डेढ़ माह से अधिक समय से उपचाराधीन करीब 9 वर्षीय बब्बर शेरनी राधिका की सोमवार सुबह मौत हो गई. 8 जुलाई को दूसरी शेरनी नीरजा द्वारा पूंछ काटे जाने के बाद उसका इलाज चल रहा था. विशेषज्ञों की सलाह पर पूंछ को काटकर छोटा किया गया, लेकिन 52 दिन तक चले इलाज के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका.

सफारी पार्क प्रशासन के अनुसार, 8 जुलाई को शेरनी राधिका की पूंछ को बब्बर शेरनी नीरजा ने काट लिया था. इसके बाद पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा से विशेषज्ञ को बुलाया गया. सफारी के वन्यजीव चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया और लगातार उसकी निगरानी की गई.

उसने खुद कई बार अपनी पूंछ काट ली थी

उपचार के दौरान राधिका का व्यवहार भी सामान्य नहीं रहा. 9 जुलाई को उसने खुद कई बार अपनी पूंछ काट ली थी. इसके अलावा वह उपचार के दौरान तीन बार अपनी पूंछ पर बैठ गई, जिससे लगे हुए टांके टूट गए. विशेषज्ञों के परामर्श और प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुसार उसका उपचार लगातार जारी रखा गया.

सफारी प्रशासन के मुताबिक पूंछ में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए विशेषज्ञों की सलाह पर राधिका की पूंछ को काटकर छोटा किया गया था. सफारी के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. रॉबिन सिंह और डॉ. शैलेन्द्र सिंह लगातार उसके उपचार में जुटे रहे. कीपर आसिफ अली और लोकेंद्र भी उसकी देखभाल में लगे रहे.

वजन में गिरावट, मल्टी ऑर्गन फेलियर का शक

लंबे उपचार के दौरान राधिका बेहद कमजोर हो गई थी. सफारी प्रशासन के अनुसार उसका वजन पहले करीब 78 से 80 किलोग्राम था. सोमवार को मौत के बाद पोस्टमार्टम के दौरान उसका वजन केवल 57 किलोग्राम पाया गया. करीब 21 से 23 किलोग्राम वजन कम होना उसकी गंभीर शारीरिक कमजोरी को दर्शाता है.

मौत की सूचना प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव उत्तर प्रदेश, लखनऊ को दी गई. उनके निर्देश पर पशु चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया. पैनल की प्रथम दृष्टया रिपोर्ट में अत्यधिक कमजोर होने के कारण मल्टी ऑर्गन फेलियर से मौत होने की संभावना जताई गई है. हालांकि वास्तविक कारण की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी.

2019 में गुजरात से आई थी शेरनी राधिका

राधिका को वर्ष 2019 में गुजरात से इटावा सफारी पार्क लाया गया था. सफारी प्रशासन के अनुसार उसकी शारीरिक अक्षमता और असामान्य व्यवहार के कारण उसे कभी पर्यटकों के सामने सफारी क्षेत्र में नहीं खोला गया. उसका इस्तेमाल प्रजनन के लिए भी नहीं किया गया था. राधिका लगभग 9 वर्ष की थी और वह कभी मां नहीं बनी.

राधिका की मौत के बाद इटावा सफारी पार्क में अब कुल 22 बब्बर शेर हैं. इनमें 16 शेरनियां और 6 शेर शामिल हैं. राधिका के निधन से सफारी प्रशासन और उसकी देखभाल में जुटे कर्मचारियों में भी शोक का माहौल है.

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