गजब! 3 गांवों में 25 लोग, सबके पासपोर्ट में एक ही पता और मोबाइल नंबर; खुलासे पर भी उठे सवाल
गाजियाबाद में 25 फर्जी पासपोर्ट मामले का खुलासा हुआ है. इन पासपोर्ट में एक ही पता और मोबाइल नंबर दर्ज था, जबकि धारक वहां नहीं रहते. पुलिस ने पोस्टमैन समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. इस घटना ने पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में पुलिस सत्यापन, एलआईयू जांच और डाक वितरण में गंभीर सेंध उजागर की है, जिससे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
राष्ट्रीय राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में गजब हो गया. यहां तीन गांवों में रहने वाले 25 लोगों का पता पासपोर्ट में सेम है. इनके मोबाइल नंबर भी सेम हैं, लेकिन इनमें से कोई भी अपने पते पर नहीं रहता. मामले का खुलासा होने पर हरकत में आई गाजियाबाद पुलिस ने 5 लोगों को अरेस्ट किया है. इनमें 4 दलाल हैं और एक डाकिया. अब पुलिस की इस कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे हैं. पूछा जा रहा है कि इन सभी 25 लोगों का पुलिस वेरिफिकेशन कैसे हुआ? साथ ही पुलिस वेरिफकेशन करने वाले पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इस घटना ने सिस्टम में भी लगी सेंध को भी उजागर किया है. इस खबर पर आगे बढ़ने से पहले जान लीजिए कि हुआ क्या है. दरअसल गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र के 3 गांवों में रहने वाले 25 लोगों के फर्जी पासपोर्ट पकड़े गए हैं. इन सभी पासपोर्ट को फर्जी पते से बनाया गया है. पासपोर्ट में जिन लोगों के नाम हैं, वह ना तो इन गांवों में रहते हैं और ना ही इन्हें यहां कोई जानने वाला है. बावजूद इसके, पासपोर्ट बनाने के लिए इनका पुलिस वेरिफिकेशन हो गया और पासपोर्ट बनने के बाद इनके पते पर डाक विभाग द्वारा डिलीवर भी कर दिया गया.
ये हुई कार्रवाई
मामले का खुलासा होने के बाद हरकत में आई गाजियाबाद पुलिस ने 5 लोगों को अरेस्ट किया है. इनमें से 4 पासपोर्ट बनवाने वाले दलाल हैं. इनकी पहचान विवेक गांधी, प्रकाश सुब्बा, अमनदीप सिंह, सतवंत कौर के रूप में हुई है. इनके अलावा पुलिस ने पोस्टमैन अरुण को भी अरेस्ट किया है. उसके ऊपर आरोप है कि प्रति पासपोर्ट 2000 रुपये लेकर इसने फर्जी पते पर पासपोर्ट डिलीवर किया. आशंका है कि इस पासपोर्ट गिरोह ने गाजियाबाद के अलावा कई अन्य जिलों में भी इसी प्रकार पासपोर्ट बनवाए हैं.
सिस्टम में सेंध लगाकर बने पासपोर्ट
किसी भी व्यक्ति का पासपोर्ट बनाने से पहले आधार कार्ड की जांच होती है, पते का सत्यापन होता है, पुलिस वेरिफिकेशन, LIU वेरिफिकेशन भी होता है. इन सारी औपचारिकताओं के बाद ही पासपोर्ट ऑफिस से आवेदक के नाम से पासपोर्ट जारी किया जाता है. इसके बाद पासपोर्ट डाक से आवेदक के पते पर भेजता है. यह भी पता सत्यापन का एक तरीका है. इस मामले को देखने से साफ पता चलता है कि इस गैंग ने पूरे सिस्टम को हैक किया और सेंधमारी कर हर स्टेज पर सिस्टम को मैनेज किया. बावजूद इसके कार्रवाई केवल पासपोर्ट डिलीवर करने वाले पोस्टमैन पर हुई है.
25 लोगों पर एफआईआर
इस मामले में गाजियाबाद पुलिस ने भोजपुर थाने में अमनप्रीत कौर, जसप्रीत कौर, रितु शर्मा, मेघा राणा, राजकुमारी दलजीत सिंह, महेंद्र कौर यशोदा राय, बसंती राय, जीत कौर, शमशेर सिंह और पोस्टमैन अरुण समेत समेत सभी 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है. पुलिस के मुताबिक यह सभी पासपोर्ट साल 2022 के अगस्त-सितंबर महीने में जारी किए गए थे. पुलिस की पूछताछ में पोस्टमैन अरुण ने बताया कि 5 महीने पहले विवेक गांधी और प्रकाश सुब्बा उसके पास आए थे. इन्होंने 2000 रुपये देकर दूसरे पते पर पासपोर्ट डिलीवर करने का ऑफर दिया था.
उठे ये सवाल
- पासपोर्ट बनने के लिए आवेदक के पते पर जाकर पुलिस वेरिफिकेशन होता है. ऐसे में सवाल यह है कि जब आवेदकों का पता ही फर्जी है तो पुलिस वेरिफिकेशन कैसे हुआ? यदि हुआ तो किससे हुआ? यह गड़बड़ी पुलिस की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं.
- पोस्टपोर्ट ऑफिस के कर्मचारियों को क्यों नहीं हुआ शक? जबकि सभी पोसपोर्ट पर एक ही पता और एक ही मोबाइल नंबर था. कायदे से यह गड़बड़ी पासपोर्ट ऑफिस में लगी मशीन ही बता देती है. इसका मतलब है कि पासपोर्ट ऑफिस में बैठे कर्मचारियों ने जानबूझकर मशीन के अलर्ट को इग्नोर किया.
- एलआईयू क्या कर रही थी? पासपोर्ट के लिए आए आवेदन की जांच सरकार की गुप्तचर एजेंसी एलआईयू भी करती है. ऐसे में सवाल यह है कि जब सभी आवेदकों का एक ही मोबाइल नंबर और पता था तो एलआईयू को पता क्यों नहीं चला? क्या एलआईयू ने मौके पर जाकर जांच नहीं की? इसके साथ एलआईयू ने आवेदकों के बारे में जानकारी कहां से जुटाई?
- कोई बड़ी साजिश तो नहीं? इतने सारे फर्जी पासपोर्ट एक ही महीने में बने. ऐसे में किसी बड़ी साजिश से भी इनकार नहीं किया जा रहा. आशंका है कि इस गैंग ने साजिश के तहत ही इतने सारे पासपोर्ट बनवाए होंगे. हालांकि अभी पुलिस इस संबंध में कुछ भी बोलने से बच रही है.
- केवल महिलाएं ही क्यों पकड़ी गई? मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने चार महिलाओं को अरेस्ट किया है. जबकि इस गैंग में ज्यादातर पुरुष हैं. ऐसे में फिर सवाल उठता है कि क्या महिलाएं ही मुख्य साजिशकर्ता हैं या फिर इनके पीछे कोई बड़ा हाथ काम कर रहा है. फिलहाल पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़कर आगे बढ़ने का दावा कर रही है.
