कांस्टेबल पर बोलने से बच रही पुलिस, IB कर रही पूछताछ; गाजियाबाद पासपोर्ट कांड की क्या है असल कहानी?
गाजियाबाद पासपोर्ट कांड में कांस्टेबल की संलिप्तता को लेकर पुलिस चुप्पी साधे हुए है. इस कांस्टेबल को IB हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. यह घोटाला सिस्टम में सेंध लगाकर हुआ, जिसमें दलाल, पोस्टमैन और पुलिसकर्मी शामिल थे. हालांकि, कार्रवाई केवल कांस्टेबल के निलंबन और कुछ दरोगाओं को लाइनहाजिर करने तक सीमित है.
गाजियाबाद पासपोर्ट कांड की वजह से गाजियाबाद पुलिस में खलबली मची है. पुलिस ने भले ही अफगानिस्तान से आकर भारत में रह रहे चार दलालों और इन्हें सहयोग करने वाले पोस्टमैन को अरेस्ट कर लिया है, लेकिन पुलिस इस गैंग में शामिल पुलिस कांस्टेबल पर बोलने से बच रही है. आलम यह है कि गाजियाबाद पुलिस के अधिकारी इस कांस्टेबल का नाम भी अपनी जुबां पर नहीं आने दे रहे. पूछने पर एक ही जवाब मिल रहा है कि जांच हो रही है.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस गैंग के लिए काम करने वाले कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है. उससे हुई पूछताछ के आधार पर ही 8 दरोगाओं को लाइनहाजिर भी किया गया है. बावजूद इसके, अभी तक मुकदमे में इस कांस्टेबल का नाम नहीं है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह कांस्टेबल फिलहाल आईबी की हिरासत में है और उससे पूछताछ की जा रही है. अभी तक पुलिस यह भी पता नहीं लगा पायी है कि इस गैंग में और कितने लोग हैं. इसके अलावा अभी तक पासपोर्ट आफिस में बैठे इनके सहयोगियों के बारे में भी पुलिस को कोई खबर नहीं है.
सिस्टम में सेंध लगाकर हुआ गोरखधंधा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पासपोर्ट बनाने के लिए पूरा सिस्टम है. यदि इस सिस्टम का सही तरीके से पालन हो तो इसमें गड़बड़ी की संभावना ना के बराबर है, लेकिन इस मामले में आरोपियों ने पूरे सिस्टम को ही तार-तार कर दिया. चूंकि पासपोर्ट के लिए आवेदन करने पर बीट कांस्टेबल वेरिफाई करता है, इसलिए आरोपियों ने बीट कांस्टेबल को ही अपने पाले में कर लिया. फिर पासपोर्ट वेरिफिकेशन और करेक्टर सर्टिफिकेट दरोगा को करना होता है. इसमें आरोपियों ने उसी कांस्टेबल की मदद ली और संबंधित दरोगाओं की आईडी हैक कर उससे ना केवल वेरिफकेशन कराया, बल्कि चरित्र प्रमाण पत्र भी जारी करा लिया.
पासपोर्ट ऑफिस में भी लगाई सेंध
पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट ऑफिस से पासपोर्ट जारी किया जाता है. इसमें आवेदक का आधार, मोबाइल नंबर, पता आदि कंप्यूटर में दर्ज किया जाता है. कायदे से दो पासपोर्ट की डिटेल मैच करने पर कंप्यूटर में वार्निंग आ जाती है और स्टॉफ द्वारा तत्काल इसे रिजेक्ट कर दिया जाता है, लेकिन यह बाधा भी आरोपियों ने पासपोर्ट ऑफिस के कर्मचारियों से मिलीभगत कर पार कर लिया. इसके बाद फिर से पता वेरिफाई करने के लिए पासपोर्ट डाक से भेजा जाता है. आरोपियों ने पोस्टमैन को अपने साथ मिलाकर इस बाधा को भी पार कर लिया.
कार्रवाई के नाम पर हुई खानापूर्ति
कायदे से इस गोरखधंधे में पूरे सिस्टम की संलिप्तता सामने आई है. खुद पुलिस अधिकारी भी मानते हैं कि दरोगाओं की जानकारी के बिना उनकी आईडी का लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं हो सकता. बावजूद इसके कार्रवाई के नाम पर केवल कांस्टेबल का निलंबन हुआ है. अभी पासपोर्ट ऑफिस के कर्मचारियों पर कोई एक्शन नहीं हुआ है. वहीं सिस्टम के आखिरी छोर पर बैठे पोस्टमैन के खिलाफ एफआईआर भी हो गई और उसे अरेस्ट भी कर लिया गया.
क्या कहते हैं अधिकारी?
डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी के मुताबिक मामले की जांच चल रही है. सेंट्रल एजेंसियां भी अपने स्तर पर जांच कर रही हैं. इस दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके मुताबिक आगे की कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ नियमानुसार एक्शन लिया जाएगा.