गाजियाबाद पुलिस में एक और भ्रष्टाचार, 50000 की रिश्वत लेते इंस्पेक्टर गिरफ्तार; एक्शन में विजिलेंस

गाजियाबाद पुलिस में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है. विजिलेंस टीम ने इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत को एक पूर्व ग्राम प्रधान से 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. इंस्पेक्टर पूर्व प्रधान को जेल भेजने की धमकी देकर घूस ले रहा था. शिकायत के बाद विजिलेंस ने जाल बिछाकर आरोपी को उसके दफ्तर से ही दबोच लिया.

गाजियाबाद में रिश्वत लेते इंस्पेक्टर अरेस्ट Image Credit:

उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे. ताजा मामला गाजियाबाद का है. यहां एक इंस्पेक्टर को 50000 रुपये की रिश्वत लेते विजिलेंस ने रंगे हाथ पकड़ा है. यह इंस्पेक्टर एक पूर्व ग्राम प्रधान को जेल भेजने की धमकी देकर घूस ले रहे थे. शिकायत पर हरकत में आई विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर इन्हें इनके ऑफिस से ही दबोच लिया है. ये इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत हैं. ये 2013 की दरोगा भर्ती में चयनित हुए और पिछले साल ही प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बने हैं.

गाजियाबाद से पहले इनकी तैनाती हापुड़ जिले में सर्विलेंस ऑफिस में थी. विजिलेंस के अधिकारियों के मुताबिक इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत ने एक पूर्व प्रधान को जेल भेजने की धमकी देकर 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी. इसकी शिकायत पूर्व प्रधान ने विजिलेंस में की और विजिलेंस के अधिकारियों के निर्देश पर 50 हजार की रकम इंस्पेक्टर के ऑफिस में जाकर उन्हें दे दिया. उस समय मौके पर मौजूद विजिलेंस की टीम ने इंस्पेक्टर को घूस की रकम के साथ धर दबोचा.

CM-PM पर आपत्तिजनक टिपपणी का मामला

पूर्व प्रधान ने विजिलेंस को दिए शिकायत में बताया कि किसी विजय सिंह नामक व्यक्ति ने उनके खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगाते हुए दो जनवरी को मुकदमा दर्ज कराया था. साल 2000 से 2005 तक निवाड़ी थाना क्षेत्र के गांव अबूपुर के प्रधान रहे पीड़ित ने बताया कि उनकी पत्नी हापुड़ में टीचर हैं. इस एफआईआर में घटना का जो समय बताया गया है, उस समय वह एसबीआई बैंक में थे. उन्होंने बताया कि चूंकि विजय सिंह से चुनावी रंजिश चल रही है, इसलिए उन्होंने मुकदमा दर्ज करा दिया था.

मामला खत्म करने के नाम पर मांगी घूस

पीड़ित ने बताया कि आरोपी इंस्पेक्टर मामले की जांच कर रहे थे, इसलिए वह खुद उनके पास पहुंचा और अपनी सफाई दी. इसपर इंस्पेक्टर ने मामले को खत्म करने के नाम पर 50000 की रिश्वत मांगी. ना देने पर जेल भेजने की धमकी दी. पीड़िता ने बताया कि उसने एसीपी मोदीनगर और डीसीपी ग्रामीण से भी न्याय की गुहार की, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. इसी दौरान इंस्पेक्टर उसके घर दबिश देने पहुंच गए और गाली गलौज की. आखिर में परेशान होकर उसने विजिलेंस में गुहार लगाई.

ऐसे बिछाया जाल

अधिकारियों के मुताबिक पीड़ित पूर्व प्रधान की शिकायत सुनने के बाद अधिकारियों ने विधिवत जाल बिछाया. इसमें तय हुआ कि आरोपी इंस्पेक्टर को घूस तो दिया जाएगा, लेकिन घूस में दिए जाने वाले नोटों पर एक विशेष तरह का कलर लगा होगा. इसके बाद जैसे ही प्रधान इंस्पेक्टर के हाथ में घूस की रकम देंगे, विजिलेंस टीम उन्हें दबोच लेगी. हुआ भी यही, प्रधान के साथ पहुंची मेरठ विजिलेंस टीम ने इंस्पेक्टर के खिलाफ जाल बिछाकर उसे रंगे हाथ पकड़ लिया है.