बच्चों को जंजीरों में बांध कर रखने को मजबूर माता-पिता; गाजीपुर में ये कैसी बीमारी, जिसने मचा रखा है कहर

गाजीपुर के फतेहुल्लापुर, बहादीपुर, हरिहरपुर, हाला, और छोटी जंगीपुर समेत करीब 12 गांवों में एक रहस्यमयी बुखार फैला हुआ है. यह बुखार छोटे-छोटे बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग बना रहा है. स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि माता-पिता को अपने बच्चों को जंजीरों से बांधना पड़ रहा है.

गाजीपुर में रहस्यमयी बुखार का कहर

गाजीपुर से एक अजीब सी स्वास्थ्य त्रासदी सामने आ रही है. यहां के तकरीब एक दर्जन गांव में बच्चे एक ऐसी बीमारी के चपेट में आ रहे हैं, जिससे वह जिंदगी भर के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग हो जा रहे हैं. इसकी शुरुआत तेज बुखार से होती है. फिर कुछ महीने बाद उनके साथ दिव्यांगता की स्थिति हो जाती है. सबसे बड़ी बात ये है कि ये बच्चे जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ होते हैं.

12 गांव प्रभावित

गाजीपुर के फतेहुल्लापुर, बहादीपुर, हरिहरपुर, हाला, और छोटी जंगीपुर समेत करीब 12 गांवों में यह स्थिति है. जब बच्चा पैदा होता है तो उसकी सेहत अच्छी होती है. फिर उसको तेज बुखार आता है और दिव्यांगता का शिकार हो जाता है. फिर मां-बाप को अपने कलेजे पर पत्थर रखकर बच्चों को रस्सियों या फिर पैरों में जंजीर लगाकर बांध कर रखना पड़ता है.

गाजीपुर के हरिहरपुर गांव दो बेटियों के साथ भी बिल्कुल ऐसा ही हुआ. एक को जन्म के 4 महीने बाद तो दूसरी को 6 महीने के बाद अचानक से तेज बुखार आया. फिर दोनों मानसिक रूप से दिव्यांग हो गई है. बच्चियों के इलाज में उनके माता-पिता लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं. लेकिन अब तक बच्चियां ना सही हो पाई हैं. ना ही उन्हें क्या बीमारी हुई यह पता चल पाया है. दोनों बच्चियों के पिता गुजरात में मजदूरी कर रहे हैं. वे काफी वक्त से घर भी नहीं आते ताकि आने-जाने में पैसे खर्च ना हो और बच्चियों का इलाज प्रभावित हो.

सैंकड़ों बच्चों को जकड़ चुकी है ये बीमारी

यह तकलीफ सिर्फ इक्का-दुक्का मां-बांप की नहीं है. फतेहुल्लहपुर ,हरिहरपुर, पठानपुर, हाला, शिकारपुर, धरी कला ,अगस्ता, भोरहा ,भिक्केपुर ,तार डीह, गोला, रठूली के साथ ही कई अन्य गांव इस तरह के कई मामले हैं. हर गांव में करीब 8 से 10 बच्चे इस अनोखी बीमारी से दिव्यांग हो चुके हैं. कुछ बच्चे जन्म के 6 महीने, कई 1 साल बाद और कुछ 2 और 5 साल बाद भी इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं.

बच्चों को जंजीरों में बांध रखना पड़ता है

परिजनों के मुताबिक उनके बच्चे स्वस्थ तो पैदा होते हैं. लेकिन अचानक से उन्हें बुखार आया. फिर इस बुखार ने बच्चों को पूरी तरह से अपाहिज बना दिया है. यहां तक कि उनके बच्चे नित्य क्रिया भी खुद से नहीं कर सकते हैं. कुछ ऐसे भी दिव्यांग हैं जिन्हें परिवार के लोग रस्सियों के सहारे या फिर जंजीरों के सहारे बांधकर रखते हैं ताकि वह कहीं इधर-उधर भाग ना जाए. एक तो अगर वे कहीं चले गए तो उन्हें खोजने में दिक्कत होगी या फिर किसी का बड़ा नुकसान कर देंगे.

अब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तक पहुंची आवाज

इन दिव्यांग बच्चों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय युवा सम्मान से सम्मानित सिद्धार्थ ने पहले एक पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को लिखा. फिर स्वास्थ्य विभाग ने यहां कैंप लगाकर बच्चों का इलाज किया. लेकिन बच्चों की हालत नहीं सुधरी. अब सिद्धार्थ राय ने इन बच्चों की तकलीफें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तक पहुंचाई है.

राज्यपाल ने दिया ये निर्देश

राज्यपाल के निर्देश पर उनके विशेष कार्य अधिकारी सुधीर एम बोबडे ने गाजीपुर जिला अधिकारी एक पत्र लिखा है और निर्देश दिया है कि बच्चों से जुड़ी बीमारी को लेकर जो स्थिति है उससे सचिवालय को रिपोर्ट भेजे. अब इस मामले पर जिलाधिकारी ने एक दिन सिद्धार्थ राय को अपने कार्यालय बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली और ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया.