नेपाल बॉर्डर पर कनेक्टिविटी बढ़ा रही सरकार, क्या है इतने एक्सप्रेसवे-हाईवे बनाने के पीछे की रणनीति?
केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश में नेपाल सीमा पर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए तेजी से काम कर रही है. आधा दर्जन से अधिक एक्सप्रेसवे और हाईवे परियोजनाएं शुरू हुई हैं, जिनका आर्थिक, औद्योगिक और विशेषकर सामरिक महत्व है. यह न केवल व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि आपातकाल में रक्षा आपूर्ति भी सुगम करेगा. गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट उत्तरी भारत में सड़क नेटवर्क की कमी को पूरा कर रहे हैं.
इस समय केंद्र सरकार का उत्तर प्रदेश में नेपाल बॉर्डर पर कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. इसी क्रम में नेपाल बॉर्डर से लगती आधा दर्जन से अधिक एक्सप्रेसवे और हाईवे की परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया है. वैसे तो इन परियोजनाओं को देश की आर्थिक और औद्योगिक महत्व का बताया जा रहा है, लेकिन सही मायने में देखा जाए तो इन सभी परियोजनाओं का सामरिक महत्व भी बहुत ज्यादा है. केंद्र केंद्र सरकार का भी कहना है कि यह महज सड़क निर्माण का प्रोजक्ट नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक सोच भी है.
नॉर्थ–साउथ कॉरिडोर को इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा बताया जा रहा है. इसी प्रकार गोरखपुर पानीपत एक्सप्रेसवे भी इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा बताया जा रहा है. रोड नेटवर्क से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक अभी तक उत्तर प्रदेश में जो भी एक्सप्रेसवे बने, वो सब पूर्व और पश्चिम में ही बने. जबकि आजादी के बाद उत्तर की ओर खासतौर पर नेपाल बॉर्डर की ओर सड़क नेटवर्क की कमी खल रही थी. यह कमी भारत-चीन युद्ध के दौरान भी बहुत खली थी. इसे देखते हुए भारत सरकार ने उत्तरी बॉर्डर पर तेज कनेक्टिविटी के लिए आधा दर्जन हाई-स्पीड कॉरिडोर पर काम शुरू किया है.
क्या होगा फायदा
इन कॉरिडोर के बनने से बॉर्डर वाले इलाकों तक पहुंच आसान हो सकेगी. इन क्षेत्रों में आर्थिक और औद्योगिक विकास की संभावनाएं खुलेंगी. इसके अलावा पयर्टन को भी बल मिलेगा. वहीं इमरजेंसी के दौरान इन्हीं सड़कों के जरिए देश की सीमाओं तक कम से कम समय में राशन से लेकर युद्धक सामग्रियों तक को पहुंचाया जा सकेगा. इसी रणनीति के तहत गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे को बेहद अहम बताया जा रहा है. यह सड़क कश्मीर से लेकर पानीपत के रास्ते गोरखपुर होते हुए सिलीगुड़ी तक है. इसमें कश्मीर से पानीपत का काम पूरा हो चुका है. पानीपत से गोरखपुर और गोरखपुर से सिलीगुड़ी के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है.
कई बॉर्डर कनेक्ट करेगी ये सड़क
अधिकारियों के मुताबिक सिलीगुड़ी-कश्मीर हाईवे जिसे गोरखपुर पानीपत एक्सप्रेस कहा जा रहा है, यह एक तरफ कश्मीर बॉर्डर को कनेक्ट कर रही है, वहीं दूसरी ओर गोरखपुर से नेपाल बॉर्डर और फिर सिलीगुड़ी पहुंच कर बांग्लादेश और चीन बॉर्डर को कनेक्ट करेगी. इस सड़क से यूपी में गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया के अलावा शामली, बागपत, शाहजहांपुर आदि जिले भी हाई-स्पीड रोड नेटवर्क से जुड़ जाएंगे. इसकी वजह से नेपाल बॉर्डर का व्यापार सीधे पश्चिमी यूपी और दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच सकेगा.
प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं ये सड़कें
इस प्रोजेक्ट में गोरखपुर पानीपत एक्सप्रेसवे सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है. करीब 750 किमी के इस प्रोजेक्ट में यूपी के 22 जिले शामिल हैं. यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के पांचों एक्सप्रेसवे को भी कनेक्ट करेगा. इसी प्रकार बाराबंकी से बहराइच तक प्रस्तावित 8 लेन की एक्सेस कंट्रोल 101 किमी लंबे हाईवे को भी इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा माना जा रहा है. यह हाईवे लखनऊ से नेपाल तक कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा. इसी प्रकार वाराणसी-गोरखपुर हाईवे को भी सीधे बॉर्डर से जोड़ने में मदद मिलेगी. गोरखपुर पानीपत को एक्सप्रेसवे को सिलीगुड़ी से जोड़ने के लिए 500 किमी का एक्सप्रेसवे भी बन रहा है. यह नेपाल बॉर्डर के सामानांतर सड़क होगी.
ये सड़कें भी हैं अहम
इसी प्रकार नेपाल बॉर्डर से मध्यप्रदेश को जोड़ने वाले 2300 किमी लंबे हाई-स्पीड कॉरिडोर का भी प्रोजेक्ट है. यह 20 जिलों को कवर करेगा. वहीं बनारस से नेपाल NH-233 भी काफी मायने रखती है. यह सड़क धार्मिक कारिडोर बनाने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को तो मजबूत तो करती ही है, इसके सामरिक महत्व भी खूब है. इनके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार भी इस क्षेत्र में बॉर्डर रोड और गांवों में कनेक्टिविटी बढ़ाने में जुट गई है.