गोरखपुर में एक अरब रुपये की ठगी का पर्दाफाश, फर्जी खातों से ऐसे किया जाता था खेल, 4 गिरफ्तार

गोरखपुर के रामगढ़ताल थाने की पुलिस ने एक अरब रुपये के ऑनलाइन स्कैम का खुलासा किया है. आरोपी में क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर सैंकड़ों लोगों को ठग चुके थे. इधर कुछ अन्य लोगों को ठगी का शिकार बनाने की फिराक में थे, उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें धर दबोचा.

गोरखपुर में एक अरब रुपये की ठगी का पर्दाफाश

गोरखपुर के रामगढ़ताल थाने की पुलिस ने एक बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने ऑनलाइन निवेश और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस गिरोह के सदस्यों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी बैंक खातों के जरिए करीब एक अरब रुपए मंगाकर क्रिप्टो करेंसी में ट्रेडिंग की और लोगों को भारी मुनाफे की लालच देते हुए ठगा है.

पकड़े गए आरोपियों की पहचान अंबेडकर नगर के जहांगीरगंज थाना क्षेत्र के लखानडीह निवासी अजीत यादव, कुशीनगर जनपद के बृजमनगंज थाना क्षेत्र के आलम चक निवासी अजय कुमार, बलिया जिले के बांसडीह थाना क्षेत्र के छोटकी सेढ़ियां निवासी पारतेश सिंह और कुशीनगर जनपद के बृजमनगंज थाना क्षेत्र के सेनूआ निवासी गणेश साहनी के रूप में हुई है. अभी पुलिस को गिरोह के एक और सदस्य शाहजहांपुर निवासी ऋषभ की तलाश है.

सैंकड़ों लोगों को बना चुके हैं शिकार

सीओ अरुण कुमार एस ने बताया कि गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है. आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है. साथ ही साइबर सेल की मदद से इस गिरोह के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस गिरोह के सदस्यों ने अब तक सैंकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया है. 20 मार्च को भी रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के एक होटल में यह गिरोह कुछ अन्य लोगों को ठगी का शिकार बनाने की फिराक में था.

लोगों को ऐसे दे रहे थे झांसा

गोरखपुर के रामगढ़ताल थाने की पुलिस को 20 मार्च को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रामगढ़ताल स्थित एक होटल में कुछ लोग फॉरेक्स ट्रेडिंग और ऑनलाइन गेमिंग में निवेश करने के नाम पर लोगों को झांसा दे रहे हैं. इस सूचना पर रामगढ़ताल थाने की पुलिस ने होटल में छापेमारी कर इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने गिरोह के सदस्यों के पास से लैपटॉप बैंक खाते से जुड़ी दस्तावेज मोबाइल फोन और विभिन्न खातों ऑन की यूजर आईडी और पासवर्ड से संबंधित डिटेल भी बरामद की है.

पुलिस अधिकारियों की माने तो यह गृह अविनियमित निक्षेप योजनाएं संचालित कर रहा था जो पूरी तरह से गैरकानूनी है, इस ठगी को लेकर कई और पीड़ितों के समाने आने की संभावना है. पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों का डिटेल खंगाल रही है, पता लगाने की कोशिश कर रहीं है कि कि ठगी में कौन-कौन लोग शामिल हुआ और ठगी की कुल रकम कितनी है. इस गिरोह के सदस्य एक खाता बंद हो जाने के बाद झांसा देकर दूसरे के नाम से खाता खुलवा लेते थे और उनकी यूजर आईडी अपने पास लेकर उससे ठगी करते थे.

पैसे मांगने पर निवेशकों से तोड़ देते थे संबंध

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी फर्जी और किराए पर लिए गए बैंक खातों का इस्तेमाल किया करते थे. इस गिरोह के सदस्य इन खातों में लोगों को निवेश के नाम पर बड़ी रकम ट्रांसफर कराई जाती थी. इसके बाद इस पैसे से क्रिप्टो ट्रेडिंग की जाती थी और निवेशकों को मुनाफे के झूठे आंकड़े दिखाकर और अधिक पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था. जब निवेशक अपने पैसों को वापस मांगते थे तो उनके साथ टालमटोल कर उनसे संबंध तोड़ दिया जाता था.

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