चार दिन, 8 टीमें, 300 सैंपल… ग्रेटर नोएडा में दूषित पानी की पड़ताल पूरी, अब लैब रिपोर्ट का इंतजार

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने दूषित पानी की शिकायतों के बाद चार में ताबड़तोड़ पड़ताल की. पानी की जांच अभियान में 8 टीमों को लगाया गया था, जिसने 300 से अधिक घरों से सैंपल लिए. शुरुआती जांच में कई क्षेत्रों में गंदा पानी मिला, जिससे लोगों की चिंता बढ़ी है. लोगों के साथ प्राधिकरण को अब लैब रिपोर्ट का इंतजार है.

ग्रेटर नोएडा वाटर क्वालिटी टेस्ट: 300 सैंपल लिए गए

ग्रेटर नोएडा में बीते दिनों दूषित पानी की शिकायतों के बाद गहन जांच शुरू किया गया. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का चार दिवसीय रैंडम जल जांच अभियान अब समाप्त हो चुका है. इस दौरान प्राधिकरण की 8 विशेष टीमों ने 300 से अधिक घरों, सोसाइटियों और सार्वजनिक स्थलों से पानी के सैंपल लेकर जांच की. शुरुआती जांच में कई इलाकों में पानी मानकों के अनुरूप पाया गया. लेकिन कुछ सेक्टरों में अब भी गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें सामने आ रही हैं.

चार दिवसीय अभियान के बाद अब प्राधिकरण की नजर लैब रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. ग्रेटर नोएडा के दो सेक्टरों में अचानक गंदा पीला और बदबूदार पानी आने की शिकायतें सामने आई थी. करीब 65 लोगों के बीमार के बाद मामला गंभीर हो गया था. इसे देखते हुए प्राधिकरण ने पूरे शहर में रैंडम जांच अभियान चलाया था.

सैंपलों को जांच के लिए सहारनपुर भेजा गया

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने जल विभाग को पानी की गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए थे. जल विभाग के अधिकारियों और तकनीकी स्टाफ को मिलाकर 8 अलग-अलग टीमों का गठन किया. इन टीमों को अलग-अलग सेक्टरों और सोसाइटियों में भेजा गया, जहां से पानी के सैंपल कलेक्ट किए गए. इन पानी के सैंपलों को जांच के लिए सहारनपुर भेजा गया है.

करीब 15 दिन के बाद यह रिपोर्ट सामने आएगी, जिसमें यह पता चल पाएगा कि आखिर ग्रेटर नोएडा शहर में पानी की गुणवत्ता क्या है? हालांकि टीडीएस कई सेक्टरों और सोसाइटी में ज्यादा पाया गया है इसके लिए प्राधिकरण ने जल विभाग को निगरानी देने के शख्स निर्देश दिए हैं. आठ टीमों ने घर-घर जाकर की जांच की, मौके पर ही प्राथमिक टेस्टिंग की गई थी.

इन सोसाइटियों और गांवों में पहुंचकर पानी की जांच

जल विभाग की टीमों में इंजीनियर तकनीकी कर्मचारी और लैब से जुड़े विशेषज्ञ शामिल थे. इन टीमों ने ग्रेटर नोएडा के डेल्टा-1 और 2,गामा-1 और 2,अल्फा-1 और 2,बीटा 1 और 2 ओमीक्रॉन, स्वर्ण नगरी, सिग्मा, सेक्टर-33 सहित ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई सोसाइटियों और आसपास के गांवों में पहुंचकर पानी की जांच की. साथ ही क्लोरीन किट की मदद से पानी की मौके पर जांच की गई.

प्राधिकरण की प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि अधिकांश सेक्टरों में जलापूर्ति का पानी मानकों के अनुरूप है और वहां स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है. कई ऐसे इलाके जहां दूषित पानी की शिकायतें लगातार आ रही थी, वहां जांच के समय पानी साफ पाया गया. हालांकि कुछ सेक्टरों और पॉकेट्स में अब भी लोगों को गंदा पानी मिलने की शिकायतें मिल रही हैं.

रिपोर्ट आने के बाद स्थायी समाधान करने का फैसला

कई क्षेत्रों में जलापूर्ति लाइनों की उम्र अधिक होने, सीवर लाइनों के पास से पानी की पाइपलाइन गुजरने और लीकेज जैसी समस्या मुख्य कारण है. अधिकारियों का कहना है कि इन इलाकों में अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान की जरूरत है. लैब रिपोर्ट आने के बाद जलापूर्ति लाइनों की मरम्मत, पाइपलाइन बदलने, फ्लशिंग और क्लोरीनेशन जैसे कदम उठाए जाएंगे.

प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके सिंह ने बताया भले ही चार दिवसीय रैंडम जांच अभियान अब समाप्त हो गया है, लेकिन स्वच्छ पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए जांच और निगरानी का काम लगातार जारी रहेगा. दूषित पानी की शिकायत मिलने पर तत्काल टीम भेजकर मौके पर जांच कराई जाएगी. लोगों से भी अपील की है कि गंदा पानी आ रहा है तो उसकी सूचना तुरंत दें.

जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा

प्राधिकरण का दावा है कि आने वाले दिनों में प्रभावित इलाकों में जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है. जिन सेक्टर में पानी की वजह से लोग बीमार पड़े हैं स्वास्थ्य विभाग के द्वारा लगातार उनकी नियमित जांच की जा रही है. मेडिकल कैंप सेक्टर में लगाए गए हैं, जिन जगहों से पानी के सैंपल कलेक्ट किए गए हैं उनकी रिपोर्ट आने के बाद अब आगे की कार्रवाई की जाएगी.