आखिर नींद से जागा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, दूषित पानी की जांच के लिए 8 टीमें गठित; सीवर और ड्रेन लाइनों की पड़ताल शुरू

ग्रेटर नोएडा में दूषित पानी की समस्या गंभीर हो गई है, डेल्टा-1 और अल्फा-2 सेक्टरों में 65 से अधिक लोग बीमार पड़े. लंबे समय बाद प्राधिकरण जागा और जांच के लिए 8 जांच टीमें गठित की हैं. सीवर और ड्रेन लाइनों की पड़ताल शुरू हो गई है. साथ ही, प्रभावित इलाकों में हेल्थ कैंप लगाए गए हैं.

ग्रेटर नोएडा में दूषित पानी पर एक्शन Image Credit:

ग्रेटर नोएडा में लंबे समय से चली आ रही दूषित पानी की समस्या आखिरकार अब प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनती नजर आ रही है. डेल्टा-1 सेक्टर के बाद अब अल्फा-2 समेत कई सेक्टरों में पानी पीने से लोग बीमार पड़ने लगे हैं जिसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी है. प्राधिकरण ने पानी की जांच के लिए 8 विशेष टीमें गठित कर दी हैं.

बीते कुछ दिनों में ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-1 में दूषित पानी पीने से आठ लोगों के बीमार होने की पुष्टि हुई. इनमें बच्चों, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थी. इसके बाद प्राधिकरण ने सेक्टर में हो रही पानी की सप्लाई की जांच शुरू की तो पाया गया कि कई जगहों पर पानी की पाइपलाइन टूटने की वजह से उनमें सीवर का पानी भी साथ जा रहा था.

लीकेज और चोक पाइपलाइन की पहचान शुरू

घरों में गंदा और बदबूदार पानी निकलने पर सेक्टर के लोगों ने इसकी शिकायत प्राधिकरण से की, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं हुई. सेक्टर अल्फा 2 में एक साथ 65 लोग बीमार होने से पूरे प्रशासन और प्राधिकरण महकमे में हड़कमप मच गया था. अब हालात को काबू में करने के लिए प्रभावित इलाकों में जगह-जगह हेल्थ कैंप लगाए गए हैं.

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्राधिकरण की ओर से 8 जांच टीमें मैदान में उतरीं गई है. इन टीमों को अलग-अलग सेक्टरों में भेजा गया है जहां वे पानी के सैंपल एकत्र कर रही हैं. साथ ही सीवर और ड्रेन लाइनों की पड़ताल और पेयजल पाइपलाइन की स्थिति देख रही हैं. लीकेज और चोक पाइपलाइन की पहचान कर रही हैं.

पाइपलाइन सिस्टम को नए सिरे से बदला जाए- मांग

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि कई महीनों से शिकायतें की जा रही थी. लेकिन प्राधिकरण ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. अब जब लोग बड़ी संख्या में बीमार हो गए तब जाकर कार्रवाई शुरू की गई है. ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों के लोगों में प्राधिकरण के खिलाफ भारी नाराजगी है.

लोगों का कहना है कि हर बार शिकायत के बाद सिर्फ अस्थायी मरम्मत कर दी जाती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जाता. आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों का कहना है कि सेक्टरों में पुरानी और जर्जर पाइपलाइन बदले बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है. उन्होंने मांग की है कि पूरे इलाके में पाइपलाइन सिस्टम को नए सिरे से बदला जाए.

उल्टी दस्त और टाइफाइड के लक्षण, हेल्थ कैंप लगे

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बीमार लोगों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार और टाइफाइड जैसे लक्षण पाए गए हैं. कुछ मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों में भेजा गया है. जबकि कुछ अन्य लोगों को कैंप से ही दवाइयां दी जा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते दूषित पानी की सप्लाई नहीं रोकी गई तो यह स्थिति महामारी का रूप भी ले सकती है.

इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है. स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित सेक्टरों में हेल्थ कैंप लगाना शुरू कर दिया है. इन कैंपों में डॉक्टरों द्वारा मरीजों की जांच मुफ्त दवाइयों का वितरण, ओआरएस और जरूरी दवाइयां दी जा रही है. गंभीर मरीजों को अस्पताल रेफर की व्यवस्था की गई है. कैंप में बड़ी संख्या में लोग जांच के लिए पहुंच रहे हैं.

श्रीराम लैब की दो टीमें भी मैदान में, पानी के लिए सैंपल

पानी की जांच को और पुख्ता बनाने के लिए प्राधिकरण ने श्रीराम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल रिसर्च की दो विशेष टीमें भी तैनात की हैं. ये टीमें शहर के अलग-अलग इलाकों से सैंपल लेकर लैब में वैज्ञानिक तरीके से जांच करेंगी. श्रीराम लैब की टीमों ने सेक्टर डेल्टा-1 के डी ब्लॉक, डेल्टा-3 के एफ ब्लॉक, अल्फा-2, बीटा-2 के एफ ब्लॉक में दौरे किए हैं.

श्रीराम लैब की टीमों ने ऐसे कई इलाकों में यूजीआर पंपिंग स्टेशन और सप्लाई प्वाइंट्स से पानी के सैंपल लिए हैं. लैब को जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि लैब की ओर से बताया गया है कि पूरी जांच प्रक्रिया में 10 से 15 दिन लग सकते हैं.

30 साल पुरानी पाइपलाइन के भरोसे ग्रेटर नोएडा

ग्रेटर नोएडा जैसे आधुनिक शहर की पहचान ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर मानी जाती है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. आज भी ग्रेटर नोएडा का बड़ा हिस्सा 30 साल पुरानी पानी और सीवर पाइपलाइन के भरोसे चल रहा है. यही जर्जर सिस्टम अब शहर के लोगों के लिए बीमारी, परेशानी और खतरे की वजह बनता जा रहा है.

ग्रेटर नोएडा का विकास 1991 के आसपास शुरू हुआ था. उसी समय पेयजल सप्लाई की पाइपलाइन सीवर लाइन ड्रेन नेटवर्क डाले गए थे. इन पाइपलाइनों की औसत उम्र 20 से 25 साल मानी जाती है लेकिन ग्रेटर नोएडा में कई जगहों पर 30 साल से ज्यादा पुरानी पाइपलाइनें आज भी इस्तेमाल में हैं. समय के साथ पाइप जंग खा चुके हैं.

प्राधिकरण का दावा लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का कहना है कि दूषित पानी की सप्लाई को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जहां भी लीकेज सीवर चोकिंग या गलत कनेक्शन पाए जाएंगे उन्हें तुरंत ठीक किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर पुरानी पाइपलाइनों को बदलने का प्रस्ताव भी तैयार किया जाएगा.

प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि सप्लाई के समय मोटर न चलाएं और अगर कहीं दूषित पानी की शिकायत मिले तो तुरंत जल विभाग को सूचना दें. हालांकि प्रशासन की सक्रियता से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है लेकिन सवाल अब भी कायम है कि क्या इस बार सिर्फ जांच तक ही मामला सीमित रहेगा या फिर जिम्मेदारी तय होगी