UP में अब सड़क पर उतरा Gen-अल्फा, DM ऑफिस में घुसकर की ये डिमांड, जानें पूरा मामला?

हमीरपुर में जेन-अल्फा छात्रों ने बदहाल सड़क के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. हाथों में तिरंगा लेकर छात्रों ने डीएम कार्यालय में घुसकर सड़क निर्माण की मांग की. ग्रामीणों के अनुसार, दशकों से पक्की सड़क नहीं बनी, बरसात में रास्ता तालाब बन जाता है, जिससे स्कूली बच्चों और मरीजों को भारी परेशानी होती है. छात्रों ने तत्काल सड़क बनवाने की मांग की.

हमीरपुर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन का वीडियो वायरल Image Credit:

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आपने नीट परीक्षा में धांधली के विरोध में Gen-G का प्रदर्शन देखा, अब उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में सड़क के लिए Gen- अल्फा सड़क पर उतर आया है. छात्रों के समूह के रूप में सड़क पर उतरे जेन अल्फा ने जमकर प्रदर्शन किया. वहीं डीएम ऑफिस में घुसकर भी हंगामा किया है. हाथों में तिरंगा लेकर डीएम ऑफिस पहुंचे इन स्कूली बच्चों ने डीएम पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए तत्काल सड़क बनवाने की मांग की.

हाथों में तिरंगा लेकर सड़क पर मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे ये स्कूली बच्चे डीएम के निजी प्रवेश द्वार से उनके ऑफिस में घुस गए. इससे पूरे कलक्ट्रेट में अफरा-तफरी मंच गई और हंगामा होने लगा. बाद में यह सभी बच्चे वहीं धरने पर बैठ गए. स्कूली बच्चों में आक्रोश सड़क की बदहाली को लेकर था. सड़क निर्माण की मांग को लेकर बच्चों और ग्रामीणों ने हाथों में तिरंगा लेकर करीब 5 किलोमीटर पैदल मार्च किया.

ग्रामीणों ने लगाए ये आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से लेकर अब तक उनके गांव की पक्की सड़क नहीं बन सकी है. बरसात के दिनों में मिट्टी की सड़क पर कई-कई फीट पानी भर जाता है, जिससे गांव का संपर्क लगभग कट जाता है. ग्रामीणों के मुताबिक, चंदूपुर मार्ग जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर है, लेकिन सड़क की हालत वर्षों से जस की तस बनी हुई है. जबकि इसी सड़क से एक दर्जन से अधिक गांव और मजरे जुड़े हुए हैं.

बरसात के दिनों में तालाब बन जाता है रास्ता

ग्रामीणों के मुताबिक बरसात के दिनों में यह रास्ता तालाब में तब्दील हो जाता है. इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ता है. सड़क पर पानी और कीचड़ होने के कारण बच्चे कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते. वहीं, रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है. कई बार जब किसी बीमार या गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है, तो गांव तक एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती.

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