हरदोई में पुलिस ने पीड़ित को ही आरोपी बना दिया, वीडियो वायरल हुआ तब जाकर खुली सच्चाई, थानाध्यक्ष सस्पेंड
हरदोई में महिला अधिवक्ता के पति पर दबंगों ने हमला कर दिया. इसकी शिकायत करने जब वह अपने पति के साथ थाने पहुंची तो पुलिस ने उल्टे उनपर ही केस दर्ज कर दिया. इस बीच हमले का वीडियो वायरल हो गया और पुलिस की पक्षपाती भूमिका भी पूरी तरह बेनकाब हो गई.
हरदोई के कछौना थाना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. यहां कानून की रखवाली करने वाले ही कानून को कुचलते नजर आए. दरअसल ये मामला कछौना देहात गांव का है. यहां दबंग ग्राम प्रधान नसीम ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर महिला अधिवक्ता फिरदौस जहां के पति सलीम को घर के बाहर खड़ी कार से जबरन खींच लिया. फिर उनपर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया. इस हमले में महिला अधिवक्ता के पति समेत 8 लोग घायल हो गए. उन्हे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा.
ग्राम प्रधान नसीम के हमले की शिकायत करने जब महिला अधिवक्ता फिरदौस जहां घायल पति और परिजनों के साथ न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंची तो वहां न्याय नहीं खुली नाइंसाफी मिली. थानाध्यक्ष ने वर्दी की मर्यादा को ताक पर रखकर पीड़ितों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया. उल्टा आरोपी ग्राम प्रधान की तरफ से पीड़ितों पर ही मुकदमा दर्ज कर आरोपी बना दिया. हमला करने वाले खुले घूमते रहे और लहूलुहान लोग कटघरे में खड़े कर दिए गए.
वीडियो वायरल होने पर सच आया सामने
यह पूरा फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ, जब मारपीट के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो में दबंगई की बर्बर तस्वीरें भी दिखीं और पुलिस की पक्षपाती भूमिका भी पूरी तरह बेनकाब हो गई. वीडियो सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. मामला सीधे उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया. सबूतों के दबाव में आखिरकार पुलिस प्रशासन को झुकना पड़ा.
ग्राम प्रधान नसीम और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
एसपी अशोक कुमार मीणा ने थानाध्यक्ष को निलंबित कर यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि वर्दी पहनकर दबंगों की ढाल बनना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पीड़ित को न्याय से वंचित करने और अपराधियों को संरक्षण देने की कीमत चुकानी ही पड़ेगी. फिलहाल पुलिस ने दबंग ग्राम प्रधान नसीम और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
