दिल्ली-NCR की मंडियों में रेट कंट्रोल करेगा हरदोई! रोज पहुंचेगी सब्जियों की खेप, गंगा एक्सप्रेसवे से आएगी खुशहाली

गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से हरदोई और शाहजहांपुर से ताजी सब्जियां सीधे दिल्ली-NCR पहुंचेंगी. इससे मंडियों में सब्जियों के दाम नियंत्रित होंगे और उनकी उपलब्धता बढ़ेगी. किसानों को भी अपनी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, जो अभी परिवहन की कमी के कारण नहीं मिल पाता था. यह एक्सप्रेसवे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए खुशहाली लाएगा.

गंगा एक्सप्रेसवे Image Credit:

मंहगी और सूखी सब्जियां खाकर ऊब चुके दिल्ली-एनसीआर वासियों के लिए एक अच्छी खबर है. 29 अप्रैल को हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन होने जा रहा है. इसके बाद गंगा की तराई में पैदा होने वाली हरी सब्जियों की बड़ी खेप रोज दिल्ली एनसीआर की मंडियों में पहुंचने लगेगी. इससे इन मंडियों में ना केवल ताजी सब्जियां भरपूर उपलब्ध होंगी, बल्कि रेट कंट्रोल भी होगा. अभी परिवहन के साधनों की कमी की वजह से इन इलाकों से सब्जियों की खेप बड़ी मुश्किल से बड़ी मंडियों तक पहुंच पाती थी.

माना जा रहा है कि गंगा एक्सप्रेसवे इन क्षेत्रों खासतौर पर शाहजहांपुर और हरदोई आदि जिलों के लिए वरदान बन सकता है. मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों से होकर निकल रहा है. यह सभी जिले गंगा के किनारे हैं और गंगा की तराई में खासतौर पर सब्जियों की खेती बहुत होती है. इन सब्जियों में भी सर्वाधिक खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूज, लौकी, कद्दू, करेला, तोरई, मूंग, उड़द, सूरजमुखी आदि बहुतायत में पैदा होता है. चूंकि अभी इन क्षेत्रों में परिवहन के साधन अच्छे नहीं है, इसलिए फसल का बड़ा हिस्सा किसानों को औने पौने दाम पर बेचना पड़ता है.

दक्षिण के राज्यों पर आश्रित नहीं होगी दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के शहर खासतौर पर जायद की फसलों के लिए दक्षिण के राज्यों पर निर्भर हैं. इस समय भी बाजार में उपलब्ध तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, लौकी, कद्दू, करेला और तोरई आदि दक्षिण के राज्यों से लाकर बेचा जा रहा है. इनके परिवहन में काफी समय लगता है, इसलिए रास्ते में ही ये सब्जियां सूख जाती है. अब गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद हरदोई और शाहजहांपुर के किसान शाम को सब्जियों की तुड़ाई कर सुबह तक दिल्ली एनसीआर की मंडियों तक पहुंचा सकेंगे.

आजादी के बाद से ही उपेक्षित था ये क्षेत्र

हरदोई में सबसे ज्यादा सब्जियों की खेती होती है, लेकिन यह इलाका आजादी के बाद से ही उपक्षित है. खासतौर गंगा समेत पांच नदियों से घिरे बिलग्राम और सवायजपुर तहसील क्षेत्र में सब्जियों का बंपर उत्पादन होता है, लेकिन सड़क और ट्रांसपोर्ट की उचित व्यवस्था के अभाव में किसानों को पूरा लाभ नहीं मिलता था. गंगा एक्सप्रेसवे इसी क्षेत्र से गुजर रहा है. इससे किसानों को नई उम्मीद जगी है. अब सूखने या सड़ने-गलने से पहले उनकी पूरी फसल महानगरों तक पहुंचेगी. इसलिए किसान इस गंगा एक्सप्रेसवे को किसान विकास पथ नाम दे रहे हैं.

सड़क ही हरेगी किसानों की पीड़ा

हरदोई के किसानों का कहना है कि हर साल गंगा उन्हें बर्बाद करती है, लेकिन बाढ़ का पानी उतरने के बाद खुशहाली भी लाती है. हालांकि यह खुशी ज्यादातर तक टिकती नहीं. कारण कि यहां पर सब्जियों का मोल सही न मिलता. हरपालपुर के रहने वाले किसान निखिल दीक्षित कहते हैं कि गंगा एक्सप्रेसवे से जल्दी सड़ने वाली फसलें जैसे कि तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा, धनिया, सौफ, मिर्च, अदरक आदि भी समय रहते मेरठ, हापुड़, नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली, संभल, बदायूं, रायबरेली, प्रतापगढ़, प्रयागराज की मंडियों तक पहुंचाई जा सकेंगी. इससे अच्छी कीमत मिल सकती है.

5 स्टार होटलों के दस्तरखानों पर हरदोई की सलाद

हरदोई में होटल कारोबारी रानू बताते हैं कि इन सब्जियों और सलाद की डिमांड बड़े होटलों में खूब है. इसके लिए किसानों को मुंह मांगी कीमत भी मिलती है. लेकिन अभी तक इसे हरदोई के बाहर के होटलों तक पहुंचाना ही मुश्किल था. अब गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और प्रयागराज के 5 स्टार होटल सीधे किसानों से सलाद की फसल खरीद सकेंगे. उन्होंने उदाहरण के जरिए समझाया कि अभी हरदोई में तरबूज 8 से 10 रुपये किलो मिल रहा है, जबकि दिल्ली में 40 से 100 रुपये का भाव है. यदि यहां से तरबूज दिल्ली जाए तो सारे खर्चे काटने के बाद भी भाव 20 रुपये से ज्यादा नहीं होगा. बड़ी बात कि यह पैसा सीधा किसान की जेब में जाएगा.

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