अदिति यादव पोस्ट मामले में आरोपी रिहा, गिरफ्तारी पर सवाल; कोर्ट ने जांच के दिए आदेश

अखिलेश यादव की बेटी पर आपत्तिजनक पोस्ट के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया, लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने के कारण कोर्ट ने उसे रिहा कर दिया. अब कोर्ट ने गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं, जिससे पुलिस की किरकिरी हुई है.

अखिलेश यादव की बेटी पर आपत्तिजनक पोस्ट: पुलिस की चूक से आरोपी रिहा

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी अदिति पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन कानून का पालन नहीं करने पर सवाल खड़े हो गए. कोर्ट ने आरोपी को रिहा करने के आदेश दे दिया. साथ गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश भी दिए हैं.

जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण यादव ने 11 जून को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था सोशल मीडिया के माध्यम से अदिति यादव की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली भ्रामक पोस्ट साझा की जा रही हैं. शिकायत में भरत कुमार पटेल, नागेश्वर सिंह बघेल और विनोद यादव नाम से संचालित आईडी का जिक्र था.

कोर्ट से आरोपी रिहा, पुलिसकर्मियों पर बैठी जांच

इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए कुछ दिनों बाद मध्य प्रदेश से नागेश्वर सिंह को गिरफ्तार किया. उसे कोर्ट में पेश किया लेकिन यहां पर पेंच यह फंस गया. क्योंकि जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज थे उसमें सजा 7 साल से कम का प्रावधान है और ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि गिरफ्तारी ना की जाए. इसपर कोर्ट ने आरोपी को रिहा कर दिया.

इस मामले में कोर्ट ने अब गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए है. और विभागीय कार्रवाई की बात कही है. जानकारी के अनुसार नागेश्वर सिंह का कहना था कि उन्होंने पोस्ट को डिलीट कर दिया था और एक वीडियो जारी करके माफी भी मांगी थी. नागेश्वर सिंह ने इसको लेकर अखिलेश यादव के पूरे परिवार से भी माफी मांगी है.

रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामले में ही गिरफ्तार का प्रावधान

पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया गया था लेकिन धाराओं में गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं था इसलिए नागेश्वर सिंह को रिहा कर दिया गया. फिलहाल अभी इस पूरे मामले में जांच चल रही है. कानून के जानकारों का कहना है कि 7 साल से कम की सजा में गिरफ्तारी नहीं हो सकती है जब तक कि रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामला ना हो.

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