लखनऊ अग्निकांड के बाद एक्शन; जांच के लिए SIT गठित, 4 अधिकारी नपे, 3 पर FIR

लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब जांच तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ने हादसे की जगह का मुआयना करने और पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय SIT का गठन किया है. साथ ही 4 अधिकारियों पर गाज गिरी है. और तीन लोगों पर FIR हुआ है.

लखनऊ अग्निकांड: CM ने बनाई दो सदस्यीय SIT

लखनऊ के अलीगंज थाना के पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद सरकार एक्शन मोड में है. मुख्यमंत्री योगी ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय SIT टीम गठित की है. वहीं, लापरवाही को लेकर चार अधिकारी पर गाज गिरी है, जबकि बिल्डिंग से जुड़े तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए उन्हें तत्काल हिरासत में लिया गया है.

अग्निकांड मामले में हाई लेवल मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसमें अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन प्रवीण कुमार शामिल हैं. इन्हें पूरे मामले की पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट सात दिन में सौंपने होंगे.

इन चार अधिकारियों पर गिरी गाज, सस्पेंड

मुख्यमंत्री आवास पर इस हाई लेवल बैठक में डीजीपी राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, एलडीए, नगर निगम और फायर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. इस मामले में सीएम योगी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. वहीं, सीएम योगी के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है.

सस्पेंड किए गए अधिकारियों में गौरव कुमार, एक्सेन कलेक्शन जानकीपुरम, कमलेन्द्र कुमार सिंह, FSSO इंदिरा नगर, अनिल कुमार, AE और JE प्रमोद पांडे शामिल हैं. इसके अलावा, पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग मालिक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इस हादसे के बाद दर्ज मुकदमे में यह पहली गिरफ्तारी मानी जा रही है.

बिल्डिंग मालिक समेत तीन लोग हुए गिरफ्तार

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामकृष्ण उपाध्याय (43 वर्ष), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62 वर्ष) और तुषॉक कृष्णा जायसवाल (31 वर्ष) शामिल हैं. इनपर BNS की धारा 110, 105, 125, 3(5) और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है.

जांच में सामने आया है कि जिस भवन में हादसा हुआ, उसकी जमीन वीरेंद्र शुक्ला के नाम बताई जा रही है, जबकि भवन का नक्शा सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला के नाम से स्वीकृत बताया जा रहा है. ये तीने अपने सगे भाई हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार भवन की देखरेख अखिल शुक्ला करते थे. वीरेंद्र शुक्ला को रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के संचालक थे.

बिल्डिंग में न फायर सिस्टम, न इमरजेसी एक्जिट

सबसे चौंकाने वाली बात है कि एक बार सुबह आग लग चुकी थी, लेकिन तब बहुत हल्की-फुलकी थी. उस समय बुझा लिया गया था. आरोप है कि आवासीय भवन के नक्शे को व्यावसायिक उपयोग के लिए स्वीकृति दी गई. एक बड़ी बात यह भी है कि ऑफिस का गेट थंब एम्प्रेशन से खुलता था, आग लगने की वजह से गेट लॉक हो गया, जिसकी वजह से लोग फंस गए थे.

निर्माण, सुरक्षा मानकों और संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. बिल्डिंग में न तो फायर सिस्टम था और न ही कोई इमरजेसी एक्जिट. पूरी बिल्डिंग में आने-जाने के लिए केवल एक ही सीढ़ी और गेट था. ऑफिस का गेट थंब एम्प्रेशन से खुलता था, आग लगने की वजह से गेट लॉक हो गया, जिसकी वजह से लोग फंस गए थे. इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई है.

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