कानपुर में UGC के नए नियमों पर छात्रों का फूटा गुस्सा, जातिवाद बढ़ाने का आरोप; फूंका पुतला
कानपुर में सीएसए के छात्रों ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. छात्रों का आरोप है कि ये नियम जातिगत भेदभाव खत्म करने के बजाय जाति के आधार पर छात्रों को बांट रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने इन नियमों को वापस लेने की मांग की, चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर वे विधानसभा का घेराव करेंगे.
यूजीसी नियमावली के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर आता जा रहा है. कानपुर में सीएसए के सैकड़ों छात्रों ने बुधवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित नए नियमों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया. छात्रों ने काली पट्टी बांधकर, काले झंडे लहराते हुए और यूजीसी का पुतला फूंका. साथ ही भेदभाव का आरोप लगाया.
प्रदर्शन कर्पूरी छात्रावास से शुरू होकर कंपनी बाग तक पैदल मार्च के रूप में निकाला गया, जहां पुतले का दहन किया गया. प्रदर्शन करने वाले सैकड़ों छात्रों का आरोप है कि यूजीसी के नए नियम, जिन्हें ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को प्रोत्साहित करने के नियम-2026’ कहा जा रहा है, जातिगत भेदभाव को रोकने के बजाय विभाजित करने का काम कर रहे हैं.
कैंपस समरसता का प्रतीक, जातिवाद नहीं चलेगा
दरइसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा ये नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ भेदभाव रोकना बताया गया है. लेकिन विरोधियों का कहना है कि इनमें सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कोई सुरक्षा या शिकायत निवारण का प्रावधान नहीं है, जिससे दुरुपयोग की आशंका है.
प्रदर्शन के संयोजक आर्यन ठाकुर ने कहा, ‘यूजीसी का दावा है कि ये नियम जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए हैं, लेकिन वास्तव में यही आयोग अब छात्रों को जाति में बांटने का कार्य कर रहा है. हमारा कैंपस समरसता का प्रतीक है, यहां जातिवाद नहीं चल सकता. नियमों में झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान नहीं है, जो छात्रों के लिए खतरा पैदा कर सकता है.’
‘एक थाली में खाते हैं, UGC हमें बांट नहीं सकती’
छात्रनेता अभिजीत राय ने कहा कि, ‘अगर किसी छात्र पर झूठा आरोप लगाया गया और साबित होने में समय लगे, या इस दौरान कोई छात्र डिप्रेशन में चला जाए या गलत कदम उठा ले, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अनस शाहू ने कहा, ‘मैं ओबीसी से हूं, यूजीसी हमें बांट नहीं सकती. हम सभी एक परिवार की तरह रहते हैं, एक थाली में बैठकर खाते हैं.’
छात्रनेता अंशुमान ने भावुक होकर कहा, टअब लगता है कि हमारा सवर्ण होना ही गुनाह हो गया है. ये नियम समानता नहीं, बल्कि नई असमानता पैदा कर रहे हैं.’ प्रदर्शन के दौरान पूरा सीएसए परिसर ‘यूजीसी मुर्दाबाद’, ‘यूजीसी रोलबैक’ के नारों से गूंज उठा. छात्राओं ने भी पुरजोर विरोध जताया. साथ ही इसे वापस नहीं लेने पर कड़ी चेतावनी दी.
‘…तो विधानसभा का घेराव करने पर मजबूर होंगे’
छात्र जितेंद्र ने चेतावनी दी, ‘अगर ये काला कानून वापस नहीं लिया गया, तो हम सभी छात्र लोकसभा और विधानसभा का घेराव करने पर मजबूर होंगे. इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी.’ यह प्रदर्शन देशभर में यूजीसी नियमों के खिलाफ चल रहे विरोध का हिस्सा है, जहां सामान्य वर्ग के छात्रों का कहना है कि नियम एकतरफा हैं और परिसरों में अराजकता फैला सकते हैं.