कानपुर देहात: 43 साल बाद ‘कैद’ से छूटे भगवान, ढोल-नगाड़ों के साथ मनाई गई दिवाली

कानपुर देहात के मूसानगर में 43 साल बाद भगवान की घर वापसी हुई है. 1983 में चोरी हुई मूर्तियां पुलिस के मालखाने में कैद थीं. लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अब उनकी रिहाई हुई है. यह कहानी आस्था, धैर्य और न्याय की एक अनूठी मिसाल है, जहां देवताओं को भी न्याय के लिए इंतजार करना पड़ा.

कानपुर देहात में आस्था का सैलाब Image Credit:

सुनकर हैरान न हो कि भगवान को भी कैद हो सकती हैं. जी हां… कानपुर देहात से एक ऐसी ही हैरान और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है. जहां भगवान की रिहाई के लिए इंसानों को अदालतों के चक्कर काटने पड़ें. लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अब भगवान की रिहाई हुई है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का माहौल है.

करीब 43 साल बाद मूसानगर के थाने से शनिवार को भगवान रिहा हुए हैं. 1983 में कस्बे के बांके बिहारी मंदिर से चोरी हुई मूर्तियों मूसानगर थाने के मालखाने में कैद थीं. गुरुवार को कोर्ट ने मूर्तियों के रिलीज आदेश जारी किया, वहीं मूर्तियां की को लेकर आज भव्य शोभायात्रा निकाली गई, इस पर लोगों में खुशी है और मिठाई भी बांटी गईं.

23 अप्रैल 1983 की रात चोरी हुई थी मूर्तियां

यह कहानी आस्था, धैर्य और न्याय की एक अनूठी मिसाल है. व्यापार मंडल के जिला महामंत्री राजीव कुमार सोनी ने बताया कि मूसानगर कस्बे में पुराना मंदिर है जिसे श्रीपटराहन मंदिर समिति संचालित करती है. 23 अप्रैल 1983 की रात चोरों ने मंदिर से भगवान राधा रानी, बलदाऊ जी, हनुमान जी, गणेश जी और गरुड़ जी की दो मूर्तियां चोरी कर ली थीं.

हालांकि, पुलिस ने कुछ दिन बाद तीन चोर पकड़े थे जिनके पास से मूर्तियां बरामद हो गई थीं. लेकिन उन्हें थाने के मालखाने में ही रख दिया गया समय बीतता गया, इधर मामला कोर्ट में था. इस कानूनी लड़ाई में 43 साल गुजर गए, भगवान थाने में “कैद” रहे और भक्त न्याय के लिए भटकते रहे. लेकिन अब भक्तों को भगवान की घर वापसी का ऐतिहासिक पल आया है.

भक्ति और उल्लास में डूबा पूरा इलाका

वहीं, साल 1995 में कोर्ट से रिहाई का आदेश भी आया, लेकिन कागजी प्रक्रिया में यह आदेश उलझ कर रह गया और फिर आया वो ऐतिहासिक दिन… जब अदालत के आदेश पर भगवान को रिहा किया गया. खबर फैलते ही पूरा मूसानगर झूम उठा. जहां हर गली, हर चौराहा आज भक्ति और उल्लास में डूबा नजर आया. ढोल-नगाड़ों की गूंज चारों सुनाई दे रही है. .

आज, फूलों से सजी भव्य शोभायात्रा के साथ भगवान की मूर्तियों की मंदिर में पुनर्स्थापना की गईं. ऐसा लग रहा है जैसे अपना कोई बिछड़ा सदस्य घर लौट आया हो. मंदिर फिर से पूर्ण हो गया है. कहते हैं न जब न्याय मिलता है… तो इतिहास बन जाता है… और मूसानगर आज उसी इतिहास का ऐतिहासिक और भव्य गवाह बना है. 

रिपोर्ट- बृजेन्द्र गुप्ता, टीवी9 कानपुर देहात

Follow Us