IIT कानपुर के छात्र मेंटल प्रेसर में क्यों? लगातार आत्महत्याओं पर SHRC ने मांगी रिपोर्ट

IIT कानपुर में छात्रों की लगातार आत्महत्याओं का मामला अब राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC)तक पहुंच गया है. इस संबंध में एक याचिका दाखिल की गई है, जिस पर आयोग ने तत्काल संज्ञान लिया है. साथ ही पुलिस कमिश्नर कानपुर और IIT के निदेशक से जांच रिपोर्ट तलब की है.

आईआईटी कानपुर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में लगातार छात्र आत्महत्याओं पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है. पिछले 25 महीनों में 9 छात्रों ने अपनी जान गंवाई है, जिससे संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य संकट गहरा गया है. इस संबंध में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसपर आयोग ने पुलिस कमिश्नर और IIT निदेशक से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है.

याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण फाइटर ने आयोग को बताया कि पिछले 25 महीनों में 9 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की है जबकि इस साल जनवरी में ही दो शोधार्थी छात्रों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. उन्होंने कहा कि यह अत्यंत चिंता का विषय है कि ऐसा कौन सा कारण है जिससे लगातार छात्र-छात्राएं आत्महत्या कर रही हैं?

यह देश की बौद्धिक संपदा का अपूरणीय नुकसान

प्रवीण फाइटर ने आयोग को बताया कि यह न केवल व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि देश की बौद्धिक संपदा का अपूरणीय नुकसान भी है. संस्थान में तनाव प्रबंधन, काउंसलिंग और समर्थन प्रणाली की कमी हो सकती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है. फाइ्टर ने आयोग से मांग की कि इन घटनाओं की जड़ तक पहुंचा जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए.

आयोग ने 16 फरवरी तक जांच रिपोर्ट किया तलब

आयोग ने इस मामले में पुलिस कमिश्नर और IIT निदेशक से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है. साथ ही निर्देश दिए कि वे 16 फरवरी 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें. आयोग ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में आत्महत्याओं के कारणों, संस्थान की नीतियों और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों का विस्तृत विश्लेषण शामिल होना चाहिए.

जांच रिपोर्ट पर 18 फरवरी को सुनवाई में होगी चर्चा

राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले में अगली सुनवाई 18 फरवरी 2026 को निर्धारित की है, जिसमें रिपोर्ट पर चर्चा होगी. लगातार हो रही सुसाइड की घटनाएं IIT कानपुर के लिए एक चुनौती है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन, नियमित काउंसलिंग सत्र और दबाव कम करने वाले कार्यक्रमों को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए.