पहाड़ों पर तैनात जवानों की जान बचाएगा DRDO का ये स्वदेशी एवलांच एयरबैग, जानें कैसे करेगा काम

हिमस्खलन के दौरान सैनिक बर्फ के नीचे दब जाते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा होता है. ऐसे में डीआरडीओ ने एक ऐसा एवलांच एयरबैग बनाया है जो ऐसी स्थिति आने पर बर्फ के भारी दबाव और बड़े टुकड़ों से जवानों की रक्षा करेगा.

जवानों की जान बचाएगा DRDO का एवलांच एयरबैग

कानपुर के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. डीआरडीओ ने स्वदेशी एवलांच एयरबैग विकसित किया है, जो हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं में सैनिकों की जान बचाने में सक्षम है. यह इनोवेशन कालपी रोड स्थित एमएसएमई एक्सपो में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) के स्टॉल पर प्रदर्शित किया गया.

डीजीक्यूए के असिस्टेंट इंजीनियर नीरज कुशवाहा ने बताया कि यह एवलांच एयरबैग विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए डिजाइन किया गया है. हिमस्खलन के दौरान सैनिक बर्फ के नीचे दब जाते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा होता है. इस एयरबैग में एक हैंडल लगा होता है, जिसे खींचते ही मात्र चार सेकंड से भी कम समय में बैग पूरी तरह फूल जाता है. फूलने के बाद यह बैग जवान के शरीर के चारों ओर एक सुरक्षात्मक कवच बनाता है, जो बर्फ के भारी दबाव और बड़े टुकड़ों से रक्षा करता है. साथ ही, यह जवान को बर्फ की सतह पर तैरने में मदद करता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल सकता है या रेस्क्यू टीम द्वारा जल्दी ढूंढा जा सकता है.

एवलांच एयरबैग में सिलिंडर की जगह बैटरी का इस्तेमाल

एयरबैग का रंग चटकीला लाल रखा गया है, ताकि बर्फ में दबे होने पर भी दूर से आसानी से दिखाई दे और बचाव कार्य तेजी से हो सके. इसे पीठ पर बैग की तरह लादा जाता है. हिमस्खलन की आशंका होने पर जवान तुरंत हैंडल खींच लेता है. पहले यह उपकरण गैस सिलिंडर से संचालित होता था, जिसे साथ रखना असुविधाजनक था. अब इसमें बैटरी अटैच की गई है, जो एक बार चार्ज होने पर 50 बार तक एयरबैग को फुला सकती है. इससे यह अधिक विश्वसनीय और उपयोग में आसान हो गया है.

माइनस 40 डिग्री में काम करने वाला लिप बाम भी DRDO ने किया तैयार

यह तकनीक पहले विदेशों से आयात की जाती थी, लेकिन अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत पूरी तरह स्वदेशी रूप से तैयार की जा रही है. इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि सैनिकों को बेहतर और सस्ता उपकरण उपलब्ध होगा. इसी स्टॉल पर डीआरडीओ ने एक अन्य उपयोगी उत्पाद भी प्रदर्शित किया है. माइनस 40 डिग्री तापमान में काम करने वाला विशेष लिप बाम भी इस एक्सपो में प्र्दर्शित किया गया.

पहले उपलब्ध लिप बाम ठंड में होठों पर सफेद परत बनाकर जम जाता था, जिससे असुविधा होती थी. नया लिप बाम ऐसी स्थिति में नहीं जमता और होठों को लंबे समय तक नरम व सुरक्षित रखता है. यह उच्च ऊंचाई वाले ठंडे इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए वरदान साबित होगा. ये दोनों उत्पाद डीआरडीओ की ओर से सशस्त्र बलों की चुनौतियों को समझकर विकसित किए गए हैं.