3 साल में 2500 लोगों को बनाया शिकार, 15 करोड़ की ठगी…कानपुर पुलिस ने डिजिटल स्कैम करने वाले 6 शातिरों को दबोचा

कानपुर पुलिस ने डिजिटल ठगी को अंजाम देने वाले एक गिरोह के 6 शातिर सदस्यों को पकड़ने में सफलता पाई है. पुलिस के मुताबिक इन लोगों ने देश के विभिन्न राज्यों में करीब 2,500 लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया और 15 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लूटी है.

डिजिटल स्कैम ( प्रतीकात्मक तस्वीर)

कमिश्नरेट कानपुर नगर की थाना शिवराजपुर पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम को साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर देशभर के लोगों को डरा-धमकाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में पुलिस ने गिरोह के 06 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है. अपराधियों की धरपकड़ करने वाली इस संयुक्त पुलिस टीम को मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से 25,000 रुपये के नकद पुरस्कार दिया गया.

​पुलिस पूछताछ और जांच में सामने आया कि इस गिरोह के सदस्य बेहद शातिर तरीके से वारदातों को अंजाम देते थे. वे खुद को पुलिस, सीबीआई (CBI), नारकोटिक्स या अन्य प्रतिष्ठित सरकारी एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ितों को वीडियो कॉल करते थे. इसके बाद, पीड़ितों को फर्जी मामलों, अवैध पार्सल या मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें घंटों ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखते थे. जब पीड़ित पूरी तरह डर जाता था, तो मामले को रफा-दफा करने के एवज में मोटी रकम ऐंठ ली जाती थी.

ठगी की रकम को ऐसे लगाते थे ठिकाने

साइबर सेल की तकनीकी जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ठगी की गई रकम को तुरंत ठिकाने लगाने के लिए अपराधी पी2पी (P2P) ट्रेडिंग का सहारा लेते थे. वे भारतीय रुपये को यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर देते थे, जिससे पैसों के ट्रेल को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता था.

3 साल से एक्टिव था यह गिरोह

एनसीआरपी (NCRP) और ‘प्रतिबिंब’ पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यह गिरोह पिछले लगभग 3 वर्षों से सक्रिय था. इस दौरान इन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में करीब 2,500 लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया और 15 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लूटी. इस काली कमाई के लेनदेन के लिए गिरोह ने 450 से अधिक फर्जी और किराए के बैंक खातों (Mule Accounts) का इस्तेमाल किया था.

यूपी से लेकर तामिलनाडु तक फैला था जाल

​पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान अशर्फ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन कुमार और कमल के रूप में हुई है. इस गिरोह का जाल उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश तक फैला हुआ था, जहाँ इनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हैं.

​पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 318(4) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य सफेदपोशों और बैंक खाता धारकों पर भी शिकंजा कसा जा सके.

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