ड्यूटी गायब थी शिक्षिका, बीमारी दिखाने के लिए रचा ये ढोंग … फिर DM ने ऐसे पकड़ लिया फर्जीवाड़ा

18 जनवरी 2026 को डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह विकास नगर स्थित जुगलदेवी सरस्वती इंटर कॉलेज के बूथ संख्या 243 का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान बीएलओ ड्यूटी पर तैनात सहायक अध्यापिका उपासना सिंह ड्यूटी से नदारद मिलीं. डीएम ने तत्काल प्रभाव से उनका वेतन रोकने का आदेश जारी किया था.इस कार्रवाई से बचने के लिए महिला टीचर ने बीमारी का बहाना बनाते हुए निजी डॉक्टर का पर्चा ऐड किया. अब जांच में ये लेटर फर्जी निकला है.

कानपुर में पकड़ा गया महिला टीचर का फर्जीवाड़ा Image Credit:

कानपुर में डॉक्टर के पर्चे में हेरफेर कर और स्वास्थ्य का झूठा बहाना बनाकर ड्यूटी से गायब रहना एक सहायक अध्यापिका को भारी पड़ गया है. जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के कड़े रुख के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत कुमार सिंह ने आरोपी शिक्षिका को औपचारिक रूप से आरोप पत्र जारी कर दिया है. शिक्षिका से सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है. संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उन्हें निलंबित करने की तैयारी है.

​मामला 18 जनवरी 2026 का है. डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह विकास नगर स्थित जुगलदेवी सरस्वती इंटर कॉलेज के बूथ संख्या 243 का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे. इस दौरान बीएलओ ड्यूटी पर तैनात सहायक अध्यापिका उपासना सिंह (वर्तमान तैनाती: भटपुरा विद्यालय, शिवराजपुर) अपने कार्यस्थल से नदारद मिलीं. निर्वाचन जैसे अति-संवेदनशील कार्य में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने तत्काल प्रभाव से उनका वेतन रोकने का आदेश जारी किया था.

​वेतन रुकने के बाद, शिक्षिका सोमवार को अपना पक्ष रखने कलेक्ट्रेट पहुंची थीं. उन्होंने प्रार्थना पत्र के साथ एक निजी डॉक्टर का पर्चा ऐड किया, जिसमें बच्चों के बीमार होने और स्वयं के अस्वस्थ होने का दावा किया गया था. हालांकि, डीएम की पैनी नजर से पर्चे की ओवरराइटिंग नहीं छिप सकी. पर्चे पर अलग-अलग रंगों की स्याही और लिखावट में असमानता देख डीएम को फर्जीवाड़े का संदेह हुआ. ​डीएम के निर्देश पर जब उक्त डॉक्टर से संपर्क किया गया, तो चौंकाने वाला सच सामने आया. डॉक्टर ने लिखित रूप में पुष्टि करते हुए बताया कि ​वह 18 जनवरी को शहर में मौजूद ही नहीं थे. ​उक्त तिथि को उन्होंने किसी भी मरीज का इलाज नहीं किया.

डॉक्टर के जवाब के बाद शिक्षिका की मुश्किलें काफी बढ़ गई है. ​बीएसए सुरजीत कुमार सिंह द्वारा जारी आरोप पत्र में मुख्य रूप से पूछा गया है कि जब डॉक्टर शहर से बाहर थे और उन्होंने इलाज की बात से इनकार किया है, तो उनके नाम का पर्चा कैसे और किसने तैयार किया? शिक्षिका को अपनी बात रखने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है. अगर एक हफ्ते में जवाब नहीं मिलता है या जवाब संतोषजनक नहीं होता है तो शिक्षिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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