आखिर किसकी मेहरबानी से बिना रजिस्ट्रेशन 4 साल तक चलता रहा आहूजा अस्पताल?
कानपुर किडनी ट्रांसप्लांटेशन केस में एक आहूजा अस्पताल का नाम सामने आया है. अब इस अस्पताल को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक आहूजा अस्पताल 4 साल तक बिना रजिस्ट्रेशन के ही चलता रहा है. इस अस्पताल का पिछले साल यानी 2025 में ही रजिस्ट्रेशन कराया गया था.
कानपुर में किडनी कांड की चर्चा जोर शोर से चल रही है. ऐसे में कानपुर के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. कानपुर का चर्चित आहूजा नर्सिंग होम पिछले चार साल से बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से संचालित हो रहा था. आश्चर्य की बात यह है कि इस लंबी अवधि के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने न तो अस्पताल को कोई नोटिस जारी किया और न ही कभी इसकी वैधता पर सवाल उठाए.
2021 से संचालित, 2025 में कराया गया था पंजीकरण
सूत्रों के मुताबिक आहूजा अस्पताल का बुनियादी ढांचा वर्ष 2021 में ही बनकर तैयार हो गया था. वर्ष 2022 से अस्पताल में विधिवत मरीजों का इलाज, ओपीडी और ऑपरेशन शुरू कर दिए गए थे. हैरानी की बात यह है कि अस्पताल को आधिकारिक लाइसेंस मात्र एक वर्ष पहले, यानी साल 2025 में प्राप्त हुआ था. इससे पहले के तीन साल तक यह अस्पताल पूरी तरह अवैध रूप से मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा था.
बिना लाइसेंस के भी पर्याप्त संख्या में मिल रहे थे मरीज
जैसे ही अस्पताल को लाइसेंस प्राप्त हुआ, यहां मानवता को शर्मसार करने वाला ‘किडनी कांड’ शुरू कर दिया गया. चोरी-छिपे किए जा रहे अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के इस कारोबार ने अब स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है. बताया जा रहा है कि अस्पताल के संचालक डॉक्टर प्रीति आहूजा और उनके पति डॉक्टर सुरजीत आहूजा की शहर के अन्य बड़े अस्पतालों और प्रतिष्ठित पैथोलॉजी लैब में गहरी पैठ है, जिसके कारण बिना लाइसेंस के भी इन्हें पर्याप्त संख्या में मरीज मिलते रहे.
CMO ने सख्त रुख अपनाया
किडनी रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने सख्त रुख अपनाया है. जिस तरह से किडनी कांड का हब यह अस्पताल चार साल तक बिना लाइसेंस के चलता रहा यह अपने आप में गंभीर लापरवाही का मामला है. चार साल तक बिना पंजीकरण अस्पताल का संचालन होना स्वास्थ विभाग के स्थानीय तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है. अधिकारियों का कहना है कि किडनी कांड में संलिप्त किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. वर्तमान में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही हैं. शहर के चिकित्सा जगत में इस खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है.