कानपुर एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा, प्रोपेलर की चपेट में आई ट्रेनी पायलट; DGCA ने शुरू की जांच

कानपुर एयरपोर्ट पर नाइट फ्लाइंग ट्रेनिंग के दौरान गंभीर हादसा हुआ. एक ट्रेनी पायलट विमान के चालू इंजन और घूमते प्रोपेलर की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई, उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया. DGCA ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित इंस्ट्रक्टर और विमान पर रोक लगा दी है.

कानपुर एयरपोर्ट Image Credit:

कानपुर एयरपोर्ट पर नाइट फ्लाइंग ट्रेनिंग के दौरान सुरक्षा मानकों में गंभीर चूक का मामला सामने आया है. 26 जून की रात एक ट्विन इंजन ट्रेनिंग विमान की लैंडिंग के बाद ट्रेनी पायलट जल्दबाजी में विमान से नीचे उतर गई, जबकि दोनों इंजन चालू थे और प्रोपेलर घूम रहे थे. इसी दौरान वह प्रोपेलर की चपेट में आ गई, जिससे उसकी पीठ पर गंभीर चोटें आईं.

हादसे के तुरंत बाद एयरपोर्ट पर मौजूद कर्मचारियों ने घायल ट्रेनी को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है. हालांकि, इस घटना को करीब दो दिन तक सार्वजनिक नहीं किया गया और रविवार को मामला सामने आया. वहीं, घटना की गंभीरता को देखते हुए DGCA ने संबंधित फ्लाइट इंस्ट्रक्टर को जांच पूरी होने तक ट्रेनिंग ड्यूटी से हटा दिया है.

प्रोपेलर रुकने से पहले विमान से निकली पायलट

जानकारी के अनुसार, गर्ग एविएशन फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (FTO) का Tecnam P2006T (VT-NBV) विमान नाइट इंस्ट्रक्शनल फ्लाइंग पर था. विमान में एक फ्लाइट इंस्ट्रक्टर और एक ट्रेनी पायलट सवार थे. लैंडिंग सुरक्षित रही, लेकिन इंजन पूरी तरह बंद होने और प्रोपेलर रुकने से पहले ही ट्रेनी विमान से बाहर निकल गई, जिससे यह दुर्घटना हुई.

मामले को गंभीर मानते हुए DGCA ने संबंधित फ्लाइट इंस्ट्रक्टर को जांच पूरी होने तक ट्रेनिंग ड्यूटी से हटा दिया है. साथ ही हादसे में शामिल Tecnam P2006T (VT-NBV) विमान के संचालन पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है. वही, दूसरी ओर, चकेरी एयरपोर्ट के निदेशक प्रदीप यादव ने इस घटना पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी- DGCA

विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी विमान से चालक दल या प्रशिक्षुओं को तभी उतरने की अनुमति दी जाती है, जब इंजन पूरी तरह बंद हो जाएं और प्रोपेलर पूरी तरह रुक जाएं. ऐसे में प्रारंभिक तौर पर यह मामला सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही, मानवीय भूल या प्रशिक्षण प्रक्रिया में कमी की ओर संकेत करता है.

DGCA ने स्पष्ट किया है कि विस्तृत जांच के बाद हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी. जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित व्यक्तियों और प्रशिक्षण संस्था के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है.

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