सरकारी घोड़ों पर अब कानपुरिए करेंगे सवारी, कानपुर पुलिस ने लिया अनोखा फैसला; ऐसे मिलेगी सुविधा

कानपुर पुलिस ने जनता और खाकी के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक नई पहल की है. अब आम नागरिक भी 'रणबीर', 'प्रबल' जैसे सरकारी घोड़ों की सवारी कर सकेंगे और घुड़सवारी का प्रशिक्षण ले सकेंगे. यह कार्यक्रम पुलिस की कार्यप्रणाली से आम जन को परिचित कराने का अवसर देगा. 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर सदस्यता अभियान शुरू हो रहा है.

कानपुर पुलिस के घोड़े

उत्तर प्रदेश में ​कानपुर की सड़कों पर जब पुलिस के घोड़े टापों की खनक और लहराती अयाल के साथ निकलते हैं, तो हर किसी की निगाहें बरबस ही उन पर टिक जाती हैं. अब तक इन घोड़ों पर केवल पुलिस वाले ही सवारी करते नजर आते थे, लेकिन शहर की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहे इन घोड़ों पर आम लोग भी सवारी गांठ सकेंगे. कानपुर पुलिस ने रणबीर, प्रबल और हिमालय जैसे जांबाज घोड़ों को अब आम कनपुरियों की सवारियों के लिए भी उपलब्ध कराने का फैसला लिया है.

कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने जनता और खाकी के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की है. इस पहल के तहत जल्द ही आम लोग भी इन घोड़ों की सवारी का आनंद ले सकेंगे और घुड़सवारी का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे. ​संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) विनोद कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुलिस की कार्यप्रणाली से आम जन को अवगत कराना और सामंजस्य स्थापित करना है.

24 घोड़े हैं पुलिस की घुड़साल में

उन्होंने बताया कि इसके लिए पुलिस विभाग द्वारा सदस्यता अभियान चलाया जाएगा. इसमें ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर सीमित संख्या में सदस्यों का चयन होगा. फिर चयनित सदस्यों को नाममात्र शुल्क पर बारी-बारी से 45 मिनट का प्रशिक्षण दिया जाएगा. ​रेलबाजार स्थित पुलिस लाइन की घुड़साल में कुल 24 घोड़े हैं. इनमें इंग्लैंड, जापान और अमेरिका से लाए गए थैरो ब्रीड (विदेशी नस्ल) के 9 घोड़े शामिल हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से खेलों में होता है. इनके अलावा 15 घोड़े काठियावाड़ी और मारवाड़ी नस्ल के हैं.

रख-रखाव पर हर साल खर्च होते हैं डेढ़ करोड़

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ​इन घोड़ों का रख-रखाव एक बड़ी चुनौती है. जेसीपी के अनुसार ​एक घोड़े पर सालाना 6 से 7 लाख रुपये खर्च होते हैं. ऐसे में ​कुल 24 घोड़ों के खान-पान और देखरेख पर करीब 1.5 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट खर्च होता है. ​इनकी डाइट में चना, जौ, चोकर और विशेष घास शामिल है. ​इनकी सेवा के लिए 9 हेड कांस्टेबल, 10 कांस्टेबल, 5 सईस और 20 राइडर की तैनाती हैं.

​युवाओं के लिए ‘नेशनल’ का रास्ता

​पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस प्रशिक्षण में युवाओं को विशेष तरजीह दी जाएगी. जो युवा घुड़सवारी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, उन्हें नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा. इसके अलावा यह प्रयास आम लोगों को पुलिस के करीब लाने और एक बेहतर वातावरण तैयार करने के लिए यह सदस्यता आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार से शुरू हो रहा है.