खामेनेई की याद में मातम! UP के इस शहर में नहीं होगा ईद का जश्न, काली पट्टी बांधकर नमाज

उत्तर प्रदेश के कानपुर में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के निधन पर शिया मुस्लिम इस साल ईद नहीं मनाएंगे. ऑल इंडिया शिया युवा यूनिट ने यह फैसला लिया है. अमेरिका-इजरायल के खिलाफ विरोध जताते हुए काली पट्टी बांधकर अलविदा जुमा और ईद की नमाज़ अदा की जाएगी. खामेनेई की 'शहादत' को लेकर वैश्विक शिया समुदाय में गहरा आक्रोश और दुख है.

मजलिस सांकेतिक तस्वीर

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की याद में उत्तर प्रदेश के कानपुर में मातम पसरा है. यहां के शिया मुसलमानों ने खामेनेई की याद में इस साल ईद का जश्न नहीं मनाने का फैसला किया है. यही नहीं, अलविदा और ईद की नमाज भी काली पट्टी बांधकर करने का फैसला लिया है. इस संबंध में ऑल इंडिया शिया युवा यूनिट की चर्च रोड ग्वालटोली की मजलिस व बैठक में चर्चा के बाद फैसला लिया गया.

इस मजलिस में खामेनेई की मौत पर अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नाराजगी जताई गई और हमले का विरोध करते हुए निर्णय लिया गया कि कोई भी शिया मुसलमान जश्न नहीं मनाएगा. इस दौरान समाज के लोगों ने कहा कि खामेनेई केवल ईरान के सुप्रीम लीडर ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े शिया धर्मगुरु भी थे. उनकी शहादत से दुनिया भर के मुसलमानों में गुस्सा है, लोग गमजदा हैं. इसे दुनिया का कोई भी अमन पसंद व्यक्ति स्वीकार नहीं कर सकता.

काली पट्टी बांधने का फैसला

बैठक में शामिल समाज से जुड़े लोगों ने कहा कि रमज़ान के पाक महीने में अमेरिका और इजरायल ने यह कायराना हरकत की है. ईरान पर हुए इस हमले में सुप्रीम लीडर खामेनेई के अलावा मासूम स्कूली बच्चों की भी जान ली है. ऑल इंडिया शिया युवा यूनिट के महासचिव नायाब आलम के मुताबिक यह कोई साधारण घटना नहीं है. इसकी वजह से हमारे दिलों पर जख्म लगा है. उन्होंने बताया कि ऐसे हाल में शिया समुदाय ने बेहद सादगी के साथ काली पट्टी बांध कर ईद मनाने का फैसला किया है.

न सिवंई बनेगी ना मनेगा जश्न

उन्होंने कहा कि इस बार ईद में किसी भी घर में न तो नए कपड़े खरीदे और पहने जाएंगे और ना ही सिवंई ही बनेगी. शिया समुदाय के लोग इस बार ईद में कोई ऐसा काम नहीं करेंगे, जिससे खुशी जाहिर हो. यहां तक कि अलविदा जुमे और ईद की नमाज़ भी काली पट्टी बांध कर अदा होगी. इस बैठक में मोहम्मद ज़की, दानिश रिज़वी, जमील हुसैन, मोहम्मद रज़ा, शहादत रिज़वी, वहदत काज़मी, शारिब अब्बास, नज़र अब्बास, शाहिद अली आदि मौजूद रहे.