कानपुर में अफसरों पर कसा शिकंजा, दो ARTO सस्पेंड, 3 महीने गायब रहे समाज कल्याण अधिकारी भी नपे

कानपुर में सरकारी अफसरों पर कड़ी कार्रवाई हुई है. दो ARTO को वसूली और अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया गया. वहीं, तीन महीने से गैरहाजिर जिला समाज कल्याण अधिकारी पर भी गाज गिरी. शासन ने लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है.

2 ARTO सस्पेंड, गैरहाजिरी पर समाज कल्याण अधिकारी भी नपे

कानपुर में सरकारी दफ्तरों में लापरवाही और अनियमितता को लेकर शासन ने सख्त कार्रवाई की है. परिवहन विभाग के दो सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (ARTO) को निलंबित कर दिया गया है. वहीं, करीब तीन महीने तक बिना अनुमति कार्यालय से गैरहाजिर रहने वाले जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर पर भी सस्पेंड हुए हैं.

परिवहन विभाग ने ARTO प्रशासन आलोक कुमार और ARTO प्रवर्तन सोमलता यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है. दोनों अधिकारियों को निलंबन अवधि में परिवहन मुख्यालय से संबद्ध किया गया है. मामले की जांच वाराणसी परिक्षेत्र के उप परिवहन आयुक्त को सौंपी गई है. साथ ही RTO प्रशासन राकेन्द्र सिंह से 15 दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है.

छापेमारी में सामने आई थी गड़बड़ी

परिवहन कार्यालय में दलालों के माध्यम से काम कराने और आवेदकों से कथित अवैध वसूली की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने 24 अगस्त को जांच कराई थी. मजिस्ट्रेट और एसडीएम की टीम ने संभागीय और सहायक परिवहन कार्यालय में पहुंचकर करीब 50 लोगों से पूछताछ की. जांच के दौरान 11 लोग संदिग्ध मिले.

आरोप है कि वे वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर लोगों से पैसे ले रहे थे. मौके से 43,485 रुपये नकद मिले. जांच में कार्यालय के दो लिपिक मधुर मिश्रा और विपिन कुमार की भूमिका भी सामने आई. इसके बाद दोनों लिपिकों समेत 15 लोगों के खिलाफ काकादेव थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया.

सोमलता के खिलाफ पहले भी शिकायत

जांच में एक ट्रक चालक ने भी आरोप लगाया कि उससे 30,200 रुपये लिए गए, लेकिन उसे 21,750 रुपये की ही रसीद दी गई. नकदी के मिलान में भी अंतर मिला. जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट परिवहन आयुक्त कार्यालय भेजी थी. ARTO प्रवर्तन सोमलता यादव के खिलाफ इससे पहले भी शिकायत हो चुकी थी.

29 अप्रैल को माल वाहनों में गिट्टी, बालू और मौरंग को निर्धारित सीमा से अधिक लादकर ले जाने के मामले में पूर्व डीजीपी डॉ. सूर्य कुमार ने परिवहन आयुक्त से शिकायत की थी. उनसे मई और जुलाई में कई बार स्पष्टीकरण मांगा गया था.

तीन महीने की गैरहाजिरी पड़ी भारी

जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर पर भी शासन ने कार्रवाई की है. उन्होंने 19 अप्रैल से एक मई तक चिकित्सीय अवकाश लिया था, लेकिन अवकाश खत्म होने के बाद भी 15 जुलाई तक कार्यालय नहीं पहुंचे. उन्होंने न तो दोबारा कार्यभार संभाला और न ही छुट्टी बढ़ाने की अनुमति ली. इस दौरान विभागीय काम प्रभावित हुआ.

छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह से लेकर एससी-एसटी उत्पीड़न पीड़ितों को मुआवजे जैसी योजनाओं के संचालन में भी अव्यवस्था मिलीं. शासन ने 28 जुलाई को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन तय समय में जवाब नहीं मिला. इतना ही नहीं, 16 अगस्त को समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के कानपुर दौरे के दौरान भी वह अनुपस्थित रहे.

शासन ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर के निलंबन के साथ उनपर विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं.

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