राम मंदिर CEO की रेस में एक और बड़ा नाम! कौन हैं रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र प्रताप पांडेय?
राम मंदिर के पहले CEO की रेस में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र प्रताप पांडेय का नाम चर्चा में है. गोरखपुर निवासी पांडेय भारतीय सेना में करीब चार दशक की सेवा के बाद 30 जून 2024 को रिटायर हुए. वह श्रीनगर स्थित चिनार कॉर्प्स के कमांडर और आर्मी वॉर कॉलेज, महू के कमांडेंट रह चुके हैं. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों, सियाचिन, लद्दाख और कारगिल से जुड़े ऑपरेशनल अनुभव के अलावा उन्हें बड़े सैन्य संस्थानों के प्रशासन का भी अनुभव है.
राम मंदिर के पहले CEO की रेस में प्रशासनिक और पुलिस सेवा के अनुभवी अधिकारियों के नामों के बीच अब एक बेहद खास नाम चर्चा में है. नाम है रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र प्रताप पांडेय का. भारतीय सेना के इस पूर्व शीर्ष अधिकारी ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन से लेकर सेना के बड़े संस्थानों की कमान तक संभाली है. वह श्रीनगर स्थित चिनार कॉर्प्स यानी XV Corps के कमांडर रहे हैं और बाद में आर्मी वॉर कॉलेज, महू के कमांडेंट भी रहे.
राम मंदिर में चंदा चोरी की घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने CEO की नियुक्ति का फैसला किया था. इसके लिए आवेदन मंगाए गए, जिसमें सबसे अधिक आवेदन सेना के रिटायर अफसरों ने किए थे. ट्रस्ट का भी मानना था कि अगर सेना के रिटायर अफसर के हाथों में राम मंदिर की कमान दी जाती है तो चंदा चोरी जैसी घटना के दाग से मुक्ति मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटना नहीं होगी. ऐसे में देवेंद्र प्रताप पांडेय के नाम की खूब चर्चा है.
गोरखपुर के रहने वाले हैं देवेंद्र प्रताप पांडेय
देवेंद्र प्रताप पांडेय का जन्म 17 जून 1964 को गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई गोरखपुर के सेंट मैरी कार्मेल और केंद्रीय विद्यालय से हुई. इसके बाद उन्होंने NDA खड़गवासला और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया. उन्होंने डिफेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री और डिफेंस एंड मैनेजमेंट स्टडीज में M.Phil भी किया. इसके अलावा उन्होंने Defence Services Staff College, Wellington और अमेरिका की National Defense University, Washington DC में भी प्रशिक्षण हासिल किया.
कश्मीर से सियाचिन तक… ऑपरेशनल अनुभव
14 दिसंबर 1985 को वह 9 Sikh Light Infantry में कमीशन हुए. यहीं से उनका करीब चार दशक लंबा सैन्य करियर शुरू हुआ. देवेंद्र प्रताप पांडेय का सैन्य करियर सिर्फ प्रशासनिक पदों तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में Counter-Insurgency Operations में काम किया. हाई-एल्टीट्यूड वॉरफेयर की ट्रेनिंग के बाद उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख के चुशुल सेक्टर में 9 Sikh Light Infantry की कमान संभाली.
उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स के एक सेक्टर की कमान भी संभाली और कंबोडिया में संयुक्त राष्ट्र के सैन्य पर्यवेक्षक के तौर पर काम किया. उनके करियर का एक अहम हिस्सा कारगिल युद्ध से भी जुड़ा रहा. वह कारगिल के दौरान हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्र में एक Infantry Brigade के Brigade Major रहे. इसके अलावा उन्होंने Army Headquarters में Infantry Directorate और Military Intelligence Directorate में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं.
Kilo Force की कमान से Chinar Corps तक
Western Command और Chetak Corps में भी उनकी जिम्मेदारियां रहीं. यानी ऑपरेशनल कमान के साथ-साथ उन्हें पॉलिसी, इंटेलिजेंस, प्लानिंग और बड़े सैन्य सिस्टम के प्रशासन का भी अनुभव मिला. मेजर जनरल बनने के बाद उन्हें कश्मीर घाटी में Counter Insurgency Force-K यानी Kilo Force की कमान मिली. इसके बाद वह सेना मुख्यालय में Additional Director General of Public Information रहे.
लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर उन्हें Territorial Army का पहला Director General बनाया गया. और फिर आया उनके करियर का सबसे चर्चित पड़ाव- श्रीनगर स्थित Chinar Corps की कमान. मार्च 2021 में उन्होंने XV Corps के General Officer Commanding का पद संभाला. Chinar Corps की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर घाटी में सैन्य अभियानों से जुड़ी है. मार्च 2021 से मई 2022 तक वह इस महत्वपूर्ण कमान पर रहे.
कश्मीर में सिर्फ ऑपरेशन नहीं, लोगों से कनेक्ट भी
देवेंद्र प्रताप पांडेय की प्रोफाइल का एक अलग पहलू भी है. Chinar Corps की कमान के दौरान सेना की नागरिकों के साथ कनेक्ट बढ़ाने वाली गतिविधियों पर भी जोर दिया गया. उन्होंने युवाओं के लिए NCC कैंपों को दूरदराज के इलाकों तक ले जाने की पहल का समर्थन किया. Machhal, Keran और Gurez जैसे क्षेत्रों में NCC गतिविधियों का विस्तार किया गया. विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए बारामूला में परिवार स्कूल जैसी पहल से भी सेना जुड़ी रही. इसके अलावा कश्मीर में ‘Save Dal और Clean Jhelum’ जैसे अभियानों में भी सेना की भागीदारी रही.
कोरोना के दौरान भी सेना की भूमिका
कोरोना संकट के समय अपने चिनार कॉर्प्स के कार्यकाल के दौरान देवेंद्र प्रताप पांडेय ने रंगरेथ स्थित एक बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट को सेना और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से दोबारा चालू कराया गया. इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन करीब 700 ऑक्सीजन सिलेंडर भरने की थी. Chinar Corps के बाद देवेंद्र प्रताप पांडेय को Army War College, Mhow का Commandant बनाया गया. उन्होंने मई 2022 से अगस्त 2023 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली.
देवेंद्र प्रताप पांडेय 30 जून 2024 को वह भारतीय सेना से रिटायर हुए. देवेंद्र प्रताप पांडेय की सैन्य सेवा को कई बड़े सम्मानों से भी नवाजा गया. उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक — 2024, उत्तम युद्ध सेवा पदक — 2022, अति विशिष्ट सेवा पदक — 2020 और विशिष्ट सेवा पदक — 2011 मिल चुके हैं. इसके अलावा उन्हें सेना के स्तर पर Commendation Cards समेत कई अन्य सैन्य सम्मान भी मिले.
