पुतला फूंकते झुलसी थीं BJP विधायक, अखिलेश यादव ने खुद मेदांता पहुंचकर पूछा हाल
महिला आरक्षण बिल विरोध में पुतला फूंकते झुलसीं BJP विधायक अनुपमा जायसवाल का हाल पूछने सपा प्रमुख अखिलेश यादव मेदांता अस्पताल पहुंचे. राजनीतिक मतभेद भुलाकर अखिलेश के इस मानवीय कदम ने सबको चौंका दिया है. उन्होंने अनुपमा के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. यह घटना आगामी चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश की सियासत में एक संवेदनशील संदेश दे रही है.
लोकसभा में महिला आरक्षण परिसीमन बिल गिरने पर बीजेपी विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने बाराबंकी में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का पुतला फूंका था. उस समय पुतला तो ठीक से जला नहीं, खुद बीजेपी विधायक बुरी तरह से झुलस गई थीं. उन्हें इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहीं अब अखिलेश यादव सियासी दुश्मनी भूलकर खुद अस्पताल पहुंचे और उनका हाल पूछा. फिर उन्होंने अनुपमा जायसवाल के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की.
बता दें कि बीजेपी ने पिछले दिनों संसद में महिला आरक्षण बिल पेश किया था, लेकिन विपक्ष के विरोध की वजह से यह बिल पास नहीं हो सका था. इसको लेकर बीजेपी की महिला नेताओं ने कांग्रेस, सपा समेत सभी विपक्षी दलों के खिलाफ हल्ला बोल दिया था. इसी क्रम में बहराइच में पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव का पुतला फूंका था. इसी दौरान आग भभक गई और इसमें खुद अनुपमा जायसवाल बुरी तरह से झुलस गई थीं.
मेदांता अस्पताल में ले रही स्वास्थ्य लाभ
इस घटना के बाद आनन फानन में अनुपमा जायसवाल को लखनऊ लाया गया. यहां उन्हें इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उनकी हालत में काफी सुधार है. उनसे मिलने के लिए पार्टी के तमाम नेता और समर्थक भी पहुंच रहे हैं. इसी क्रम में सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मंगलवार को सियासी मतभेद भुलाकर मेदांता अस्पताल पहुंचे और उन्होंने अनुपमा जायसवाल का हाल पूछने के बाद उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की.
पार्टी के अन्य नेता भी रहे मौजूद
मेदांता अस्पताल पहुंचे अखिलेश यादव के साथ सपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी भी थे. उन्होंने भी अनुपमा जायसवाल से बात की और उनके स्वास्थ्य की कामना की. बता दें कि आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है. सत्ता पक्ष हो या विपक्ष एक दूसरे के खिलाफ किसी भी हद तक बयानबाजी करने लगे हैं. ऐसे माहौल में अखिलेश यादव का यह कदम बेहद संवेदनशील और मानवीय संदेश देता दिखा. इसकी चर्चा भी राजनीतिक हलकों में तेज हो गई है.