आलम बदी को क्यों माना जाता था UP का सबसे ईमानदार विधायक?
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक आलम बदी का गुरुवार को निधन हो गया. अपनी सादगी और ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाने वाले आलम बदी टीनशेड वाले साधारण घर में रहते थे और सालों तक जनसेवा को प्राथमिकता देते रहे. 2022 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने करीब 50 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की थी. उन्होंने मंत्री पद का प्रस्ताव भी यह कहकर ठुकरा दिया था कि जनता से दूरी नहीं बनाना चाहते.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सादगी, ईमानदारी और जनसेवा का पर्याय माने जाने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक आलम बदी का गुरुवार सुबह निधन हो गया. उनके निधन के साथ ही प्रदेश ने एक ऐसे जनप्रतिनिधि को खो दिया, जिनकी पहचान सत्ता या सुविधाओं से नहीं, बल्कि सादगी और सिद्धांतों से थी. आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए आलम बदी आज भी टीनशेड वाले साधारण घर में रहते थे.
करीब छह दशक तक सक्रिय राजनीति में रहने के बावजूद उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ. यही वजह रही कि उन्हें उत्तर प्रदेश के सबसे ईमानदार और सादगीपूर्ण नेताओं में गिना जाता था. 2022 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति सिर्फ 50 लाख रुपये बताई थी. इसमें भी चल संपत्ति 19 लाख रुपये और अचल संपत्ति 30 लाख रुपये थी. आइए जानते हैं सपा के सबसे बुजुर्ग विधायक आलम बदी के बारे में-
पांच बार बने विधायक, लेकिन नहीं बदली जीवनशैली
आलम बदी पहली बार साल 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे. इसके बाद उन्होंने 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी जीत दर्ज की. 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. भाजपा की लहर वाले चुनावों में भी उन्होंने अपनी लोकप्रियता के दम पर जीत हासिल की. इतनी लंबी राजनीतिक पारी के बावजूद उन्होंने कभी आलीशान बंगला, लग्जरी गाड़ियों या बड़े सुरक्षा काफिले को अपनी पहचान नहीं बनने दिया.
टीनशेड वाले घर में रहते थे
आलम बदी आजमगढ़ के कुर्मीटोला मोहल्ले में एक साधारण टीनशेड वाले मकान में रहते थे. पांच बार विधायक बनने के बाद भी उन्होंने अपना रहन-सहन नहीं बदला. वह अक्सर रोडवेज बस, साइकिल या स्कूटर से ही क्षेत्र और लखनऊ के बीच यात्रा करते थे. उनके पास कोई भव्य बंगला या महंगी एसयूवी नहीं थी. कई बार वह बुलेरो गाड़ी में सफर करते दिखाई देते थे.
मंत्री पद भी ठुकरा दिया
आलम बदी के राजनीतिक जीवन का एक बड़ा प्रसंग यह भी रहा कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादवने उन्हें मंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था. हालांकि उन्होंने यह कहते हुए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया कि मंत्री बनने के बाद जनता से दूरी बढ़ जाएगी. उनका मानना था कि जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा दायित्व लोगों के बीच रहना और उनकी समस्याओं को सुनना है.
चुनाव में नहीं छपवाते थे पोस्टर-बैनर
जहां आज चुनाव प्रचार करोड़ों रुपये खर्च कर किया जाता है, वहीं आलम बदी चुनाव के दौरान पोस्टर और बैनर तक नहीं छपवाते थे. उनका कोई सोशल मीडिया अकाउंट भी नहीं था. इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे.
महात्मा गांधी से लेते थे प्रेरणा
आलम बदी अक्सर अपनी सादगी का श्रेय महात्मा गांधी के विचारों को देते थे. एक बार उनसे पूछा गया कि अन्य विधायक सरकारी बंगले और महंगी गाड़ियों का उपयोग करते हैं, लेकिन वे टीनशेड वाले घर में क्यों रहते हैं? इस पर उन्होंने कहा था कि आजादी का अर्थ विलासिता नहीं, बल्कि जनता की सेवा है. उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा था कि उन्होंने सब कुछ त्यागकर देश और समाज की सेवा को चुना था और वही उनके लिए प्रेरणा हैं.