अवैध बिल्डिंग, 15 मौतें और 4 FIR… एक्शन में सरकार, लखनऊ अग्निकांड में अब तक क्या हुआ?
लखनऊ के अलीगंज में अवैध व्यावसायिक बिल्डिंग में अग्निकांड से 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. यह इमारत 2014 में अधिकारियों की मिलीभगत से आवासीय से व्यावसायिक में बदली गई थी, लेकिन बिल्डिंग बाइलाज के मुताबिक आपातकालीन निकास समेत अन्य जरूरी संसाधन नहीं बढ़ाए गए. योगी सरकार ने मालिक समेत 4 पर FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की, साथ ही SIT जांच के आदेश दिए हैं.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अलीगंज अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस अग्निकांड में कुल 15 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 8 से अधिक लोग बुरी तरह झुलस गए थे. इनमें से छह लोगों को तो अस्पताल से छुट्टी मिल गई है, लेकिन दो लोग अभी भी अस्पताल में हैं. इस घटना के बाद एक्शन में आई योगी सरकार ने बिल्डिंग मालिक समेत कुल 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया. रात में ही इनमें से तीन लोगों को अरेस्ट भी कर लिया. बावजूद इसके, हादसे पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.
खुद सरकार भी मान रही है कि यह हादसा नहीं, गैर इरादतन हत्या है. दरअसल, साल 2014 तक यह बिडिंग महज आवासीय इमारत थी. लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से बिना मौका देखे इसे कमर्शियल बना दिया गया. इस बिल्डिंग का आवासीय नक्शा रामेश्वरम ग्रुप के मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, सुरेंद्र प्रताप और धीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम से पास हुआ था. उस समय ऊपर के फ्लोर पर जाने के लिए संकरी सीढ़ी थी. साल 2014 में यह बिल्डिंग कमर्शियल तो हो गई, लेकिन ना तो सीढी चौड़ी हुई और ना ही आपातकाल में बाहर निकलने के लिए इमरजेंसी एग्जिट बनाया गया.
12 साल में नहीं हुई जांच
नगर निगम साल 2014 से ही इस बिल्डिंग से कमर्शियल टैक्स वसूल कर रहा है. बावजूद इसके, आज तक कभी भी नगर निगम के अधिकारियों ने ना तो खुद बिल्डिंग का मुआयना किया और ना ही फायर एनओसी की डिमांड की. दमकल विभाग ने भी कभी अपनी ओर से इस बिल्डिंग के निरीक्षण की जहमत नहीं उठाई. अब इस हादसे के बाद 2014 में इस बिल्डिंग को कमर्शियल सर्टिफिकेट देने वाले 16 अफसरों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है.
शवों का हुआ पोस्टमार्टम
पुलिस ने इस हादसे के शिकार सभी लोगों के शवों का पोस्टमार्टम कराया है. इनमें से 13 शवों को उनके परिजनों को सौंपा जा चुका है. वहीं बाकी दो शवों के परिजनों के आने का इंतजार है. वहीं KGMU में भर्ती 8 घायलों में से छह लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होने पर रात में ही डिस्चार्ज कर दिया गया. जबकि दो लोगों का इलाज अभी KGMU के ट्रामा सेंटर में चल रहा है. इनमें एक लड़की लवप्रीति है और दूसरा जयंत नाम का युवक है.
मौत का पिंजरा बन गया था फ्लोर
स्थानीय लोगों के मुताबिक बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर एनिमेशन एवं गेमिंग सेंटर था. इसमें आने जाने के लिए बॉयोमेटिंग लॉक वाले गेट लगे थे. आग की घटना के दौरान ये गेट लॉक हो गए थे. चूंकि बाहर निकलनक का कोई और रास्ता था नहीं, ऐसी स्थिति में यह पूरा फ्लोर मौत का पिंजरा बन गया था और अंदर फंसे लोग काफी कोशिश के बाद भी बाहर नहीं निकल पाए.
जांच के लिए SIT गठित
इस हादसे को गंभीरता से लेते हुए सीएम योगी ने एसआईटी का गठन करते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा कि इस हादसे के लिए जो भी दोषी होगा, उसे किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कोष से सभी मृतकों और घायलों के लिए मुआवजा राशि भी घोषित की है. इसी क्रम में मंगलवार की सुबह 6 सदस्यीय फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची है.
