किन 19 लोगों को गन लाइसेंस देने पर HC ने योगी सरकार से मांगा जवाब, ये है पूरी लिस्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर और हथियार लाइसेंसों के दुरुपयोग पर बेहद सख्त टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है और इससे कानून का राज कमजोर होता है. योगी सरकार, सभी जिलाधिकारियों, पुलिस कमिश्नरों और एसएसपी से इस मामले में जवाब मांगा गया है. कोर्ट ने पूछा कि आखिर ऐसे लोगों को लाइसेंस किस आधार पर दिए गए?
उत्तर प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर और हथियार लाइसेंसों के दुरुपयोग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ कहा है कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा पैदा करता है और कानून का राज कमजोर करता है. हाईकोर्ट ने योगी सरकार, सभी जिलों के डीएम, पुलिस कमिश्नर और एसएसपी से जवाब तलब किया है. कोर्ट ने यह भी पूछा है कि आखिर आपराधिक मुकदमों वाले लोगों को हथियार लाइसेंस कैसे मिल गए?
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट में जय शंकर उर्फ बैरिस्टर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदेश में हथियार लाइसेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए. न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में ऑर्म्स एक्ट और उससे जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है. अदालत ने माना कि हथियार लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और ट्रांसफर की प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती जा रही है.
इस दौरान हाई कोर्ट के सामने राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए.
- प्रदेश में अब तक 10 लाख 8 हजार 953 हथियार लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं.
- 23 हजार 407 आवेदन अभी भी लंबित हैं.
- 1 हजार 738 अपीलें कमिश्नरों के पास लंबित हैं.
- 6 हजार 62 ऐसे लोगों को लाइसेंस दिए गए हैं, जिन पर दो या उससे ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं.
अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर ऐसे लोगों को हथियार लाइसेंस किस आधार पर दिए गए? हाईकोर्ट ने कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है. अदालत ने साफ कहा कि आत्मरक्षा के नाम पर ‘गन कल्चर’ को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता. कोर्ट के मुताबिक हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन सामाजिक सौहार्द बिगाड़ता है और कानून व्यवस्था पर गलत असर डालता है.
सुनवाई के दौरान अदालत ने कई प्रभावशाली राजनीतिक और सामाजिक व्यक्तियों के मामलों पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उनके हथियार लाइसेंसों की समीक्षा क्यों नहीं की गई. अदालत ने यह भी जानकारी मांगी है कि किन लोगों को सरकारी सुरक्षा मिली हुई है, उनकी सुरक्षा श्रेणी क्या है और कितने पुलिसकर्मी तैनात हैं. जिन लोगों की डिटेल मांगी गई हैं, वो हैं-
- रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया)
- धनंजय सिंह
- सुशील सिंह
- बृजभूषण शरण सिंह
- विनीत सिंह
- अजय मरहद
- सुजीत सिंह बेलवा
- उपेंद्र सिंह गुड्डू
- पप्पू भौकाली
- इंद्रदेव सिंह
- सुनील यादव
- फरार अजीम
- बादशाह सिंह
- संग्राम सिंह
- सुल्लू सिंह
- चुलबुल सिंह
- सनी सिंह
- छुन्नू सिंह
- डॉ. उदय भान सिंह
हाई कोर्ट ने गृह विभाग, सभी जिलाधिकारियों, पुलिस कमिश्नरों और एसएसपी को आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही अधिकारियों से शपथपत्र मांगा गया है कि अदालत से कोई जानकारी छिपाई नहीं गई है. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर किसी अधिकारी ने तथ्य छिपाए तो उसे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा. अब सबकी नजर 26 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां सरकार और पुलिस प्रशासन को विस्तृत जवाब देना होगा.