‘अगर ट्रस्ट में मुसलमान होता तो उसका एनकाउंटर कर देते’, राम मंदिर पर बोले ओवैसी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है. ओवैसी ने कहा कि यदि इसी तरह के मामले में किसी मुस्लिम का नाम होता, तो उसका एनकाउंटर कर दिया जाता. उन्होंने कानून के समान और निष्पक्ष अनुपालन की मांग करते हुए कहा कि आर्थिक अनियमितता के हर मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है. ओवैसी ने आरोप लगाया कि यदि इसी तरह के मामले में किसी मुस्लिम का नाम सामने आता, तो उसके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता और उसका एनकाउंटर कर दिया गया होता.
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘अगर राम मंदिर ट्रस्ट में कोई मुसलमान होता और चंदा चोरी होती, तो उसका एनकाउंटर कर देते. ओवैसी ने कहा कि कानून का व्यवहार सभी नागरिकों के साथ समान होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग मामलों में कार्रवाई का तरीका अलग दिखाई देता है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में आर्थिक अनियमितता या चोरी के आरोप हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
क्या है राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला?
अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया है. 5 जून को चोरी पकड़ी गई. इसके बाद ट्रस्ट के कहने पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मामले की जांच की. जांच में चढ़ावा चोरी की पुष्टि हुई. इसके बाद 8 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया. पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों में बैंक से जुड़े 6 आउटसोर्स कर्मचारी और ट्रस्ट से जुड़े 2 कर्मचारी शामिल हैं.
इनमें से 7 आरोपियों के पास से 80 लाख रुपये भी बरामद किए गए थे. जांच के बाद ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों (चंपत राय और अनिल मिश्रा) ने भी अपने पदों से इस्तीफा दिया. जिस मंदिर के निर्माण के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालुओं ने दान दिया और जहां प्रतिदिन लाखों रुपये का चढ़ावा आता है, वहीं चढ़ावे की गणना के दौरान चोरी ने पूरे देश को हिला दिया. ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है.
कैसे होती है राम मंदिर में चढ़ावे की गणना?
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु नकद और अन्य प्रकार का चढ़ावा चढ़ाते हैं. मंदिर परिसर में लगे दानपात्र (दान पेटियां) समय-समय पर खोले जाते हैं. चढ़ावे की गणना एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है। इसमें ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के अलावा बैंक से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारी भी शामिल होते हैं. पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग और निगरानी की व्यवस्था भी रहती है ताकि पारदर्शिता बनी रहे. गिने गए पैसे बैंक में जमा कराए जाते हैं.
चोरी का शक कैसे पैदा हुआ?
सूत्रों के अनुसार, चढ़ावे की गणना के दौरान कुछ कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं. प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर लंबे समय से सुनियोजित तरीके से चढ़ावे में हेराफेरी की जा रही थी. इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई और सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की गई. इसी दौरान गणना में लगे कर्मियों के घर से लाखों रुपये कैश बरामद हुए.
अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए?
अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें छह आरोपी बैंक से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारी बताए गए हैं— अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्र और रमाशंकर मिश्र. इसके अलावा ट्रस्ट से जुड़े दो कर्मचारी भी गिरफ्तार किए गए— टिन्नू यादव (रामशंकर) और सुभाष श्रीवास्तव. पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की साजिश रची.
कितनी रकम बरामद हुई?
गिरफ्तार सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस के अनुसार गिरफ्तार सात आरोपियों से करीब 79 लाख 85 हजार रुपये बरामद किए गए. सुभाष श्रीवास्तव से कोई नकदी बरामद नहीं हुई, लेकिन पुलिस का आरोप है कि वह कथित साजिश का हिस्सा थे. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह रकम कितने समय में कथित रूप से निकाली गई और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे.
