कलंक से मुक्ति की साधना! अयोध्या में करेंगे चातुर्मास, 4 महीने रामलला की शरण में चंपत राय
राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय ने अपने जीवन को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने अपने जीवन का पहला चातुर्मास (25 जुलाई-21 नवंबर) अयोध्या में करने का फैसला किया है. राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कलंक से जूझ रहे चंपत राय के इस फैसले का लक्ष्य आत्मचिंतन व आध्यात्मिक शुद्धि कर कलंक से मुक्ति पाना बताया जा रहा है. इस दौरान वह रामलला की शरण में रहकर मंत्र जाप, रामचरितमानस पाठ और सात्विक जीवन बिताएंगे.
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के कलंक से जूझ रहे चंपत राय ने अपने जीवन को लेकर बड़ा फैसला किया है. उन्होंने अपने जीवन का पहला चातुर्मास अयोध्या में करने का निर्णय लिया है. धार्मिक परंपरा के अनुसार 25 जुलाई से 21 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक चलने वाले इस चार माह के कालखंड में वह अयोध्या नहीं छोड़ेंगे. इस दौरान वह रामलला की शरण में रहकर मंत्र जाप, रामचरितमानस का नियमित पाठ, तपस्या और सात्विक जीवनचर्या का पालन करेंगे.
सूत्रों के अनुसार चंपत राय 23 जून से ही राम मंदिर परिसर से सटे रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र भवन में एक प्रकार के एकांतवास में रह रहे हैं. बताया जाता है कि वह प्रतिदिन करीब चार घंटे साधना करते हैं. सुबह राम मंत्र का जाप और रामचरितमानस का पाठ करते हैं, जबकि शाम के समय सीमित लोगों से ही मुलाकात कर रहे हैं. वहीं अब उनके अयोध्या में चातुर्मास करने के ऐलान से तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है.
क्या धुल जाएगा कलंक?
धार्मिक मान्यता के अनुसार चातुर्मास आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक साधना का काल माना जाता है. इस दौरान एक ही स्थान पर रहकर जप, तप, दान, व्रत और भगवान की आराधना करने की परंपरा है. माना जाता है कि इससे व्यक्ति अपने दोषों का परिमार्जन, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करता है. चंपत राय का यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर के चर्चित चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर उन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है. ऐसे में उनके चातुर्मास को लेकर धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
गोविंददेव गिरी भी कर रहे प्रायश्चित पूजन
राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि भी चढ़ावा प्रकरण के बाद कथित तौर पर 70 वैदिक पंडितों के साथ 10 दिवसीय प्रायश्चित पूजन करवा रहे हैं. इसे मंदिर की मर्यादा, आस्था और शुद्धिकरण से जोड़कर देखा जा रहा है. बता दें कि स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज के कोषाध्यक्ष रहते हुए ही राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया है. जिसकी जांच एसआईटी कर रही है.