राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में अब आगे क्या? जांच में कई बड़े खुलासों की तैयारी
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच अब तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और एसआईटी साक्ष्य जुटाने में लगी हैं तथा जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है. शुरुआती कार्रवाई छोटे कर्मचारियों पर केंद्रित रह सकती है, जबकि ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे की भी चर्चा है. जांच एजेंसियां आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों और बैंक लेनदेन की भी पड़ताल करेंगी.
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच का दायरा लगातार बढ़ता नजर आ रहा है. एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज होने के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियां साक्ष्य जुटाने में लगी हैं. सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं. जांच में नए नाम जुड़ने के साथ-साथ आरोपियों की संपत्तियों की भी पड़ताल की जाएगी.
छोटे कर्मचारियों तक सीमित रखने की कोशिश?
सूत्रों के अनुसार, जांच के शुरुआती चरण में मामला छोटे कर्मचारियों तक सीमित रखने की कोशिश हो सकती है. दावा किया जा रहा है कि शुरुआती कार्रवाई उन्हीं लोगों पर केंद्रित रहेगी, जिनकी सीधी भूमिका सामने आई है. हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि विवेचना पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी और किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख पदाधिकारी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे सकते हैं. इससे यह संदेश देने की कोशिश हो सकती है कि जिनकी निगरानी में कथित लापरवाही हुई, वे अब जिम्मेदारी से हट गए हैं. हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
संपत्तियों की होगी जांच, जब्ती की भी तैयारी
जांच एजेंसियों की नजर अब आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों पर भी है. सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ सालों और महीनों में कुछ आरोपियों की आर्थिक स्थिति में असामान्य वृद्धि के संकेत मिले हैं. दावा किया जा रहा है कि जो लोग पहले साधारण जीवन जीते थे, वे अब महंगी गाड़ियों में चलने लगे और उन्होंने मकान, प्लॉट तथा अन्य संपत्तियां भी खरीदीं. पुलिस अब इन संपत्तियों के स्रोत की जांच करेगी. यदि जांच में कोई संपत्ति अवैध आय से अर्जित पाई जाती है, तो उसके चिह्नीकरण के बाद जब्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है.
बढ़ सकती है आरोपियों की संख्या
एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है. सूत्रों के मुताबिक यह जानबूझकर किया गया है ताकि विवेचना के दौरान सामने आने वाले नए नामों को भी मुकदमे में शामिल किया जा सके. जांच अधिकारियों का मानना है कि दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ के दौरान कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं. ऐसे में आरोपियों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.
बैंककर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
सूत्रों का दावा है कि जांच में कुछ बैंककर्मियों की संदिग्ध भूमिका से जुड़े साक्ष्य भी मिले हैं. इसी वजह से एफआईआर में सरकारी कर्मचारी की संलिप्तता से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दान और चढ़ावे की राशि के जमा, निकासी और लेखांकन की प्रक्रिया में कहीं किसी स्तर पर मिलीभगत तो नहीं हुई. यदि बैंकिंग प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या सहयोग के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है.