CCTV, SOP और सुरक्षा.. सब फेल; राम मंदिर चढ़ावा कांड में SIT की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में बड़े गबन का खुलासा हुआ है. SIT की जांच रिपोर्ट ने ट्रस्ट और SBI दोनों की घोर लापरवाही उजागर की है. MoU और SOP में तय कड़े सुरक्षा प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, सीसीटीवी फुटेज की कमी और पर्यवेक्षण के अभाव ने इस घोटाले को बढ़ावा दिया.
अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम के कथित गबन मामले की जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच वर्ष 2024 में हुए एमओयू (MoU), सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में तय की गई SOP के अधिकांश सुरक्षा प्रावधानों का पालन नहीं किया गया.
ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच सख्त सुरक्षा प्रावधान तय किए गए थे. इनमें गणना कक्ष में प्रवेश-निर्गमन पर फ्रिस्किंग, निर्धारित वेशभूषा, हुंडीवार गणना, निजी सामान पर प्रतिबंध, बायोमीट्रिक उपस्थिति और निरंतर पर्यवेक्षण शामिल थे. SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से अधिकांश प्रावधानों का केवल कागजों पर पालन हुआ, व्यवहार में नहीं.
गणना कक्ष प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल
जांच में गणना कक्ष में कार्यरत कर्मचारियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करूणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा पर सीधे चोरी, आपराधिक दुर्विनियोग, आपराधिक न्यासभंग और चोरी की संपत्ति से जुड़े आरोप पाए गए हैं. ट्रस्ट द्वारा नियुक्त गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं.
जांच में सुभाष श्रीवास्तव पर नियमित तलाशी न कराने और सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से लागू न करने का प्रमुख दायित्व ठहराया गया है. वहीं रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर बिना औपचारिक अधिकार के हुंडियों की चाबियां संभालने और अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को गणना ड्यूटी पर लगवाने का आरोप है, जिससे कथित गबन को आसान बनाया गया.
ट्रस्ट-SBI के बीच SOP अनुपालन का अभाव
रिपोर्ट में ट्रस्ट और बैंक दोनों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्ट) और तत्कालीन शाखा प्रबंधक गोविंद मिश्रा (SBI) द्वारा हस्ताक्षरित SOP के बावजूद पर्यवेक्षण, समीक्षा और अनुपालन का अभाव रहा. गणना कक्ष में CCTV फुटेज मात्र 45 दिन तक रखने की व्यवस्था भी संवेदनशील कार्य के लिए अपर्याप्त बताई गई है.
जबकि ऑडिट में गणना कक्ष में CCTV फुटेज को कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी. वहीं, अब जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है.
