2027 से पहले कौशल किशोर के बदले सुर! अपनी ही सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
यूपी में भाजपा के पूर्व मंत्री कौशल किशोर ने स्कूल बंदी और आउटसोर्सिंग नीतियों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. लखनऊ में 'आत्मसम्मान रैली' आयोजित कर उन्होंने इन मुद्दों पर विरोध जताया, हालांकि भाजपा छोड़ने की अटकलों को खारिज किया. 2027 चुनाव से पहले यह रुख भाजपा के लिए चुनौती भरा हो सकता है, जहां वह आम आदमी के मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं.
उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री और मोहनलालगंज से पूर्व सांसद कौशल किशोर के तेवर पार्टी के लिए असहज करने वाले संकेत दे रहे हैं. रविवार को लखनऊ में आयोजित ‘आत्मसम्मान रैली’ में कौशल किशोर ने सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए. हालांकि उन्होंने बीजेपी छोड़ने की चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए इसे विरोधियों की अफवाह बताया.
पारख महासंघ के बैनर तले जुटे समर्थक
पूर्व मंत्री कौशल किशोर ने अपने संगठन पारख महासंघ के बैनर तले राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर आत्मसम्मान रैली आयोजित की. उन्होंने कहा कि सरकारी प्राइमरी स्कूलों को बंद करना और नौकरियों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू करना आम लोगों और कर्मचारियों के हित में नहीं है.
उन्होंने दावा किया कि देशभर में करीब 90 हजार सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं. कौशल किशोर ने इसे लोगों के आत्मसम्मान से जोड़ते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण कर्मचारियों का शोषण हो रहा है.
आउटसोर्सिंग कर्मियों से शिक्षामित्रों तक का मुद्दा
कौशल किशोर ने कहा कि पारख महासंघ सिर्फ स्कूल बंदी के मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा. संगठन आउटसोर्सिंग कर्मियों, कोटेदारों, शिक्षामित्रों, मजदूरों और शोषित वर्ग के आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ेगा.
उनका यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब बीजेपी उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है. ऐसे में बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री का अपनी ही सरकार की नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक मंच से आवाज उठाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बीजेपी छोड़ने की चर्चा पर दिया ये जवाब
रैली के बाद कौशल किशोर के बीजेपी छोड़ने की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ा. हालांकि उन्होंने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी छोड़ने की चर्चा विरोधियों की चाल और अफवाह है. उन्होंने रैली को भी गैर राजनीतिक बताया.
हालांकि, गौर करने वाली बात यह रही कि रैली से स्थानीय बीजपी नेताओं और संगठन से जुड़े कई पदाधिकारियों ने दूरी बनाए रखी. वहीं मोहनलालगंज विधायक अमरेश रावत रैली में शामिल हुए. कई स्थानीय जनप्रतिनिधि, ब्लॉक प्रमुख, प्रधान और बीडीसी सदस्य भी कार्यक्रम में मौजूद रहे.
स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान की भी उठी मांग
कौशल किशोर ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल की तर्ज पर देशभर में प्रेरणा स्थल बनाए जाने की मांग की. उन्होंने वीरांगना ऊदा देवी, शहीद भगत सिंह और नेताजी सुभाष चंद्र बोस समेत स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं स्थापित करने की बात कही.
उन्होंने यह भी मांग की कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और उनके विचारों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए. इसके अलावा नेपाल में स्थित बेगम हजरत महल की समाधि के अंश लखनऊ लाकर सम्मानपूर्वक स्थापित करने की मांग भी उठाई.