हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट विवाद: डॉ. अमोद सचान को बड़ी राहत, चेयरमैन बने रहने का दावा
हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन पद को लेकर चल रहा विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच तक पहुंच गया है. डॉ. आमोद कुमार सचान के अधिवक्ताओं के मुताबिक, हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत के 8 जुलाई 2026 के आदेश को निरस्त कर मामला दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया है. इससे ट्रायल कोर्ट का अंतरिम आदेश प्रभावी हो गया है. सचान पक्ष का दावा है कि फिलहाल डॉ. आमोद कुमार सचान ही ट्रस्ट के अध्यक्ष और अधिकृत हस्ताक्षरी हैं. वहीं, बृज किशोर सिंह के दावों को उनके वकीलों ने भ्रामक बताया है.
हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है. ट्रस्ट के चेयरमैन पद और उसके संचालन को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डॉ. अमोद कुमार सचान को बड़ी राहत मिलने का दावा किया गया है. सचान के वकीलों की माने तो हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत के 8 जुलाई 2026 के आदेश को निरस्त करते हुए मामला दोबारा सुनवाई के लिए अपीलीय अदालत भेज दिया. इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट का अंतरिम आदेश प्रभावी हो गया है.
डॉ. अमोद सचान के वकील भानु प्रताप मिश्रा व स्कन्ध बाजपेयी ने दावा किया कि वर्तमान में सचान ही ट्रस्ट के अध्यक्ष और अधिकृत हस्ताक्षरी हैं. अधिवक्ताओं ने बृज किशोर सिंह के दावों को भ्रामक करार दिया. ट्रायल कोर्ट ने पहले डॉ. अमोद कुमार सचान को ट्रस्ट के चेयरमैन के तौर पर काम करने में दखल देने से दूसरे पक्ष को रोका था. साथ ही ट्रस्ट के बैंक खातों को ट्रस्ट डीड के मुताबिक संचालित करने का निर्देश दिया गया था. हालांकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में अंतिम तौर पर यह फैसला नहीं किया है कि चेयरमैन पद पर स्थायी अधिकार किसका है.
क्या है हाईकोर्ट का आदेश?
हिन्द चैरिटेबल ट्रस्ट की शुरुआत करीब दो दशक पहले हुई. डॉ. आमोद कुमार सचान के पक्ष के मुताबिक, ट्रस्ट की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी और डॉ. सचान इसके अध्यक्ष रहे हैं. बृज किशोर सिंह भी ट्रस्ट के ट्रस्टियों में शामिल थे, लेकिन समय के साथ ट्रस्ट के संचालन और अध्यक्ष पद को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ता गया. एक पक्ष का दावा है कि डॉ. सचान को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और बृज किशोर सिंह ने खुद को ट्रस्ट का नया अध्यक्ष बताना शुरू किया. इसी को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा.
चेयरमैन कौन? विवाद की असली जड़
डॉ. सचान के लीगल एडवाइजर का कहना है कि सिविल कोर्ट ने पहले ही डॉ. सचान के पक्ष में आदेश दिया था. इसके बाद विरोधी खेमे ने इस आदेश को अपर जिला जज की अदालत में चुनौती दी थी. अपर जिला जज ने सिविल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया था. यानी डॉ. सचान के खिलाफ फैसला आया था. इसके बाद अपर जिला जज की अदालत के फैसले को डॉ. सचान की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. अब हाईकोर्ट ने मामले को अपीलीय अदालत के पास दोबारा भेजते हुए नियमानुसार सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं.
डॉ. सचान के अधिवक्ताओं के मुताबिक, 15 तारीख को मामले की अगली सुनवाई होनी है. यानी फिलहाल विवाद का अंतिम न्यायिक फैसला अभी बाकी है.
हाईकोर्ट के आदेश को लेकर सचान पक्ष का दावा
डॉ. सचान के लीगल एडवाइजर भानु प्रताप मिश्रा का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक बृज किशोर सिंह की स्थिति चेयरमैन की नहीं बल्कि ट्रस्टी की है. उनका दावा है कि अदालत ने अपीलीय अदालत को मामले को दोबारा सुनने के निर्देश दिए हैं. साथ ही उनका कहना है कि ट्रस्ट के बैंक खातों और संचालन से जुड़े अधिकार डॉ. आमोद कुमार सचान के पास भी हैं.
बैंक खातों का संचालन कौन करेगा?
हाईकोर्ट ने ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी अहम अंतरिम व्यवस्था की है. आदेश के मुताबिक, डॉ. सचान और रिचा मिश्रा अकेले या आपस में मिलकर ट्रस्ट के बैंक खातों का संचालन नहीं करेंगे. खातों का संचालन डॉ. अमोद सचान और संस्थापक ट्रस्टी विक्रम सिंह के संयुक्त रूप से करने की व्यवस्था की गई है. इन खातों से कर्मचारियों और डॉक्टरों के वेतन, बैंक और वित्तीय देनदारियों, बिजली-पानी जैसे जरूरी खर्च, टैक्स और वैधानिक भुगतान किए जा सकेंगे. हर भुगतान की जानकारी अपीलीय अदालत को देनी होगी.
