निगम-आयोग और बोर्ड में पुराने कार्यकर्ताओं की बारी, बीजेपी ने तेज की समायोजन की कवायद
बीजेपी ने मार्च में नगरीय निकाय चुनावों में 2802 पार्षदों की नियुक्ति की थी. इसके साथ ही निगम, आयोग, बोर्ड और प्राधिकरणों में रिक्त पदों के लिए जिला इकाइयों से नाम मांगे गए थे. क्षेत्रीय टीमों और प्रदेश स्तर पर इन नामों पर मंथन भी शुरू हो गया था, लेकिन विभिन्न कार्यक्रमों, अभियानों और दीन दयाल उपाध्याय प्रशिक्षण कार्यशालाओं के कारण सूची अंतिम रूप नहीं ले सकी.लेकिन अब बीजेपी ने फिर से समायोजन की कवायद तेज कर दी है.
चुनावी वर्ष में संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर चुकी भाजपा अब पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं के समायोजन पर ध्यान केंद्रित कर रही है. जिला कार्यकारिणियों के गठन और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब पार्टी की नजर निगम, आयोग, बोर्ड, प्राधिकरण तथा विभिन्न समितियों में खाली पड़े दर्जनों पदों पर टिकी हुई है.प्रदेश इकाई ने ऐसे अनुभवी कार्यकर्ताओं की सूची तैयार की है, जो न सिर्फ लंबे समय से पार्टी की सेवा कर रहे हैं, बल्कि जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को भी ध्यान में रखते हुए फिट बैठते हैं.
सूत्रों के अनुसार, माह के अंत तक प्रदेश पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय अध्यक्षों की सूची जारी करने के साथ-साथ इन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी.पार्टी ने मार्च में नगरीय निकाय चुनावों में 2802 पार्षदों की नियुक्ति की थी. इसके साथ ही निगम, आयोग, बोर्ड और प्राधिकरणों में रिक्त पदों के लिए जिला इकाइयों से नाम मांगे गए थे. क्षेत्रीय टीमों और प्रदेश स्तर पर इन नामों पर मंथन भी शुरू हो गया था, लेकिन विभिन्न कार्यक्रमों, अभियानों और दीन दयाल उपाध्याय प्रशिक्षण कार्यशालाओं के कारण सूची अंतिम रूप नहीं ले सकी.
इस वजह से समायोजन की प्रक्रिया में देरी हुई
पिछले एक माह से पार्टी जिला इकाइयों के गठन में व्यस्त रही. सभी छह क्षेत्रों से जिला अध्यक्षों और जिला प्रभारियों को लखनऊ बुलाकर जिलास्तरीय टीमों का गठन किया गया. इस दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’, महिला आक्रोश पदयात्राएं और जनसभाएं भी पार्टी की प्राथमिकता में रहीं, जिससे समायोजन की प्रक्रिया थोड़ी प्रभावित हुई.
किन्हें मिलेगी प्राथमिकता?
सूत्र बताते हैं कि पूर्व जिलाध्यक्षों, क्षेत्रीय पदाधिकारियों और पूर्व विधायकों को जातिगत समीकरणों के आधार पर वरीयता दी जाएगी. साथ ही प्रदेश मोर्चों में लंबे समय से सक्रिय पदाधिकारियों को भी समायोजित करने की योजना है. पार्टी का प्रयास है कि अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ताओं को उचित स्थान मिले, ताकि आगामी चुनावी तैयारियों में वे और अधिक मजबूती से योगदान दे सकें.भाजपा सूत्रों का कहना है कि यह समायोजन न केवल पुराने कार्यकर्ताओं के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दर्शाएगा, बल्कि संगठन को और अधिक मजबूत एवं संतुलित भी बनाएगा.