पहले ग्राम प्रधान और जिला पंचायत अध्यक्ष, अब ब्लॉक प्रमुख बनेंगे प्रशासक; 9 जुलाई को पूरा हो रहा कार्यकाल

उत्तर प्रदेश में ब्लॉक प्रमुख भी 19 जुलाई को कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक बनेंगे. ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों की तर्ज पर वे केवल रूटीन के कार्य कर पाएंगे, नीतिगत फैसले नहीं ले सकेंगे. पंचायती राज विभाग ने सीएम योगी को प्रस्ताव भेजा है, जिस पर 18 जुलाई तक मुहर लगने की उम्मीद है. पंचायत चुनाव में देरी के चलते यह फैसला लिया गया है.

उत्तर प्रदेश में कार्यकाल पूरा कर चुके ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाने के बाद सरकार अब ब्लाक प्रमुखों को भी प्रशासक बनाने जा रही है. इनका भी कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म हो रहा है. प्रशासक बनाए जाने के बाद ब्लाक प्रमुख भी अपने विकास खंड में रूटीन के काम करा सकेंगे. हालांकि बतौर प्रशासक वह कोई नीतिगत फैसले नहीं ले सकेंगे. उम्मीद है कि प्रदेश सरकार इस संबंध में 18 जुलाई तक आदेश जारी कर सकती है.

बताया जा रहा है कि प्रशासक रहते हुए यदि ब्लाक प्रमुखों को कोई नीतिगत निर्णय लेना होगा तो वो डीएम को प्रस्ताव भेजेंगे और शासन की हरी झंडी के बाद ही इस प्रस्ताव पर आगे काम कराया जा सकेगा. माना जा रहा है कि ग्राम प्रधान और जिला पंचायत अध्यक्ष की तरह ही इनका भी कार्यकाल अधिकतम छह महीने का होगा. हालांकि यदि पंचायत चुनाव पहले हो जाते हैं तो नए ब्लाक प्रमुख चुने जाने के बाद इस कार्यकाल को समाप्त माना जाएगा.

सीएम योगी को भेजा प्रस्ताव

पंचायत चुनाव में हो रही देरी और ब्लाक प्रमुखों के खत्म हो रहे कार्यकाल को देखते हुए पंचायती राज विभाग ने ब्लाक प्रमुखों को प्रशासक बनाने के लिए प्रस्ताव तैयाकर सीएम योगी को भेज दिया है. माना जा रहा है कि 19 जुलाई को इनका कार्यकाल खत्म होने के ठीक पहले यानी 18 जुलाई को मुख्यमंत्री कार्यालय से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी. इससे पहले मुख्यमंत्री कार्यालय से जिला पंचायत अध्यक्षों और ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के संबंध में आदेश जारी किया गया था.

हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला

इससे पहले ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के खिलाफ एक अपील हाई कोर्ट भी पहुंची है. इस अपील पर सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन चूंकि इसी तरह का एक मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में भी पेंडिंग है, इसलिए मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा था लखनऊ खंडपीठ में दो न्यायाधीशों की बेंच उस मामले की सुनवाई कर रही है, इसलिए इस मामले की सुनवाई एकल पीठ में नहीं हो सकती.

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