वापस होगा बिजली बिल पर 10% एक्सट्रा चार्ज! CM योगी आज करेंगे समीक्षा, उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत

बिजली बिलों पर लगाए गए 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी. उन्होंने लिखित रूप से यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय के संबंध में उनसे कोई राय नहीं ली गई. दूसरी ओर, राज्य विद्युत नियामक आयोग ने भी अधिभार लगाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विपरीत बताया है. ऐसे में मामला अब सरकार के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गया है.

हट सकता है बिजली बिल पर 10% एक्सट्रा चार्ज Image Credit: AI Generated

उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और विद्युत निगम प्रबंधन के बीच 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आज प्रस्तावित समीक्षा बैठक पर निगाहें टिक गई हैं. शक्ति भवन के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद विवादित अधिभार को वापस लेने पर फैसला हो सकता है.

ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने हाल ही में बिजली बिलों पर लगाए गए 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी. उन्होंने लिखित रूप से यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय के संबंध में उनसे कोई राय नहीं ली गई. दूसरी ओर, राज्य विद्युत नियामक आयोग ने भी अधिभार लगाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विपरीत बताया है. ऐसे में मामला अब सरकार के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गया है.

सरकार अधिभार वापस लेने पर विचार कर रही है

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक से पहले विद्युत निगम प्रबंधन शक्ति भवन में तैयारियों में जुटा हुआ है. अधिकारियों द्वारा ईंधन अधिभार, संविदा कर्मियों की स्थिति और विभागीय प्रशासन से जुड़ी पत्रावलियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, सरकार उपभोक्ताओं में बढ़ते असंतोष को देखते हुए अधिभार वापस लेने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर सकती है.

संविदा कर्मियों का मुद्दा भी बना सिरदर्द

ऊर्जा मंत्री द्वारा संविदा कर्मियों को हटाने और उनकी जगह नए लोगों की नियुक्ति के मुद्दे को उठाए जाने के बाद निगम प्रबंधन ने सभी वितरण कंपनियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. डिस्कॉम से पूछा गया है कि कितने संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त की गईं, उनकी जगह कितने नए कर्मी रखे गए और उनकी कार्यप्रणाली क्या है. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की समीक्षा में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है.

उधर, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जून माह में वसूले जा रहे 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार का विरोध करते हुए नियामक आयोग में याचिका दाखिल की है. परिषद का कहना है कि नियमों के विपरीत उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है और तत्काल राहत दी जानी चाहिए.

निजीकरण के विरोध में तेज हुआ आंदोलन

इसी बीच बिजली क्षेत्र में निजीकरण के मुद्दे पर भी माहौल गरमाता जा रहा है. ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के आंदोलन को समर्थन देते हुए केंद्र सरकार के प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक-2025 और वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है.

बेंगलुरु में हुई फेडरेशन की संघीय कार्यकारिणी बैठक में उत्तर प्रदेश के हालात पर विशेष चर्चा की गई. संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में पिछले 562 दिनों से आंदोलन जारी है. फेडरेशन ने आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों के तबादले और संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त किए जाने पर भी चिंता जताई है.

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