डिजिटल अरेस्ट कर 1.55 करोड़ की ठगी, लखनऊ पुलिस ने 43 लाख रुपये कराए वापस

लखनऊ में साइबर ठगों ने महिला डॉक्टर जिया सुल्ताना को डिजिटल अरेस्ट कर 1 करोड़ 55 लाख रुपये ठग लिए. ठगों ने खुद को पुणे ATS का अधिकारी बताया और डॉक्टर के आधार नंबर का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में होने का डर दिखाया. शिकायत मिलते ही लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस ने बैंकिंग चैनल पर कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने कई बैंक खाते फ्रीज कराकर अब तक 43 लाख 14 हजार 24 रुपये पीड़िता को वापस करा दिए हैं.

पुलिस ने पैसा वापस दिलाया Image Credit:

लखनऊ में साइबर ठगों ने एक महिला डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 1 करोड़ 55 लाख रुपये ठग लिए. ठगों ने खुद को महाराष्ट्र के पुणे ATS का अधिकारी बताया और महिला को उसके आधार नंबर के गैरकानूनी और आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने का डर दिखाया, लेकिन लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पीड़िता को बड़ी राहत मिली है. पुलिस ने ठगी की रकम में से 43 लाख 14 हजार 24 रुपये वापस करा दिए हैं.

ठगी की रकम देश के कई राज्यों के खातों से होती हुई करीब 300 खातों तक पहुंची थी. दरअसल, लखनऊ की रहने वाली डॉक्टर जिया सुल्ताना साइबर ठगों के निशाने पर आईं. ठगों ने फोन किया और खुद को पुणे, महाराष्ट्र के ATS यानी एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड का अधिकारी बताया. और डॉक्टर को डराया कि उनके आधार नंबर का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी और आतंकी गतिविधि में किया गया है. इसके बाद शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट का खेल.

चार बैंक खातों में ट्रांसफर

ठगों ने डॉक्टर को इस कदर डराया कि वह उनके बताए निर्देशों का पालन करती चली गईं और देखते ही देखते उनके खाते से 1 करोड़ 55 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए. पीड़िता ने ठगी की शिकायत लखनऊ साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई. पुलिस ने मामला दर्ज होते ही बैंकिंग चैनल पर तेजी से कार्रवाई शुरू की. ठगी की पूरी रकम सबसे पहले केरल, कर्नाटक, गौतमबुद्ध नगर और महाराष्ट्र के चार बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी.

फिर 300 खातों में पहुंचाई गई

लेकिन ठगों ने रकम को इन खातों में ज्यादा देर नहीं रखा. पुलिस जांच में सामने आया कि रकम को आगे इंडसइंड बैंक के गुरुग्राम स्थित एक खाते में ट्रांसफर किया गया. इसके बाद रकम करीब 300 अलग-अलग खातों में पहुंचाई गई. पुलिस के मुताबिक इन खातों के जरिए फर्जी गेमिंग ऐप और वेबसाइट के पेआउट सेटलमेंट किए गए. यानी ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में घुमाकर उसकी पहचान और ट्रैकिंग मुश्किल बनाने की कोशिश की गई.

28 फीसदी रकम वापस

लेकिन इस पूरे खेल में लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस ने तेजी दिखाई. पुलिस ने संबंधित बैंकों और दूसरे माध्यमों से तत्काल समन्वय किया. फ्रॉड में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों को फ्रीज कराया गया और इसी कार्रवाई के चलते 1 करोड़ 55 लाख रुपये की ठगी में से 43 लाख 14 हजार 24 रुपये पीड़िता को वापस करा दिए गए. यानी करीब 28 फीसदी रकम फिलहाल वापस कराई जा चुकी है. पुलिस की जांच अभी जारी है.

पुलिस करेगी ये जांच

शेष रकम की बरामदगी, ठगी में शामिल आरोपियों की पहचान, उनकी गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई…इन सभी पहलुओं पर पुलिस काम कर रही है. इस कार्रवाई में साइबर क्राइम थाने की टीम की भूमिका अहम रही. प्रभारी निरीक्षक आलोक राव, निरीक्षक समीम अली सिद्दीकी और आरक्षी धनीश कुमार यादव ने रकम को वापस कराने की कार्रवाई में सक्रिय भूमिका निभाई. पीड़िता ने लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस का आभार जताया.

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