न जमानत, ना ही बरी; फिर कैसे हुई गैंगस्टर रवि काना की रिहाई? सरकार ने ले लिया बड़ा एक्शन
बांदा जेल से गैंगस्टर रवि काना की रिहाई पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बिना जमानत या बरी हुए उसकी रिहाई पर सवाल उठने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई की. बांदा के जेलर को निलंबित कर दिया गया है और जेल अधीक्षक के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. वहीं कोर्ट ने भी इस अनियमितता पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्टीकरण मांगा है.
बांदा की जेल में बंद गौतमबुद्ध नगर का कुख्यात स्क्रैप माफिया रविंद्र नागर उर्फ रवि काना को अचानक रिहा कर दिया गया. शनिवार की देर रात यह गैंगस्टर जेल से बाहर भी आ गया. बड़ी बात यह कि इस गैंगस्टर को न तो कोर्ट ने जमानत दी है और ना ही उसे बरी किया है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जेल प्रबंधन किस बिनाह पर उसे आजाद किया. सोशल मीडिया पर यह सवाल जब तूल पकड़ने लगा तो प्रदेश सरकार हरकत में आई. अब इसी मामले में सरकार ने बांदा के जेलर केपी यादव को सस्पेंड कर दिया है.
सरकार ने जेल अधीक्षक के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. रवि काना के खिलाफ नोएडा के सेक्टर-63 थाने में कई गंभीर आपराध के मामले दर्ज हैं. पिछले साल उसे नोएडा पुलिस ने उसे विदेश से अरेस्ट कर नोएडा जेल भेजा था, जहां से उसे बांदा जेल में स्थानांतरित किया गया था. उसके खिलाफ 29 जनवरी 2026 को गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने बी वारंट जारी किया था. इसमें उसे नोएडा की अदालत में पेश किया जाना था.
कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
जेल प्रबंधन का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर इस गैंगस्टर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया, लेकिन उसके थोड़ी ही देर बाद यानी शाम करीब 6:39 बजे उसे बांदा जेल से रिहा भी कर दिया गया. उसकी रिहाई के थोड़ी ही देर बाद यानी करीब 7:45 बजे जेल प्रबंधन को कोर्ट का वारंट प्राप्त हुआ. यह अनियमितता सामने आने पर गौतमबुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सख्त रुख अपनाते हुए जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है.
अभी फरार है यह गैंगस्टर
अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही करार दिया. पूछा कि क्यों ने आरोपी को हिरासत से फरार मानकर FIR दर्ज किया जाए. चूंकि यह गैंगस्टर अभी फरार है, इसलिए उत्तर प्रदेश पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है. उधर, उत्तर प्रदेश कारागार महानिदेशक पीसी मीणा ने मामले की जांच डीआईजी जेल प्रयागराज को सौंपी और उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर जेलर केपी यादव को सस्पेंड किया है. इस मामले में उन्होंने जेल अधीक्षक विक्रम सिंह यादव से खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं.
रिहाई की खबर से मचा हड़कंप
गैंगस्टर रवि काना की रिहाई की खबर से प्रदेश में हड़कंप मच गया है. गैंगस्टर एक्ट में इस बदमाश की गिरफ्तारी साल 2024 में हुई थी. अब उसकी रिहाई पर गौतमबुद्ध नगर के CJM संजीव कुमार त्रिपाठी ने बांदा जेल सुपरिटेंडेंट को कारण बताओ नोटिस दिया है. पूछा है कि “आपने आरोपी को, जो दूसरे मामले में आपकी जेल में बंद था, कोर्ट के किसी नोटिस के बिना किन परिस्थितियों में और किस आधार पर रिहा किया है? कोर्ट ने यह भी पूछा कि हिरासत से आरोपी के भगाने” के लिए आपके के खिलाफ मामला क्यों दर्ज नहीं किया जाना चाहिए?