प्रधान ही चलाएंगे गांव की सरकार, CM योगी ने दी मंजूरी; UP में पहली बार लागू होगी ये व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के कारण अब ग्राम प्रधान ही गांवों की सरकार चलाएंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह व्यवस्था यूपी में पहली बार लागू होगी, जिसमें वर्तमान प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे. इससे गांवों में विकास कार्य जारी रह सकेंगे, जो ओबीसी आरक्षण संबंधी लंबित मुद्दों के कारण चुनावों में देरी से प्रभावित नहीं होंगे.

पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट Image Credit:

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का टलना तय है. इसी के साथ साफ हो गया है कि भविष्य में चुनाव होने तक गांवों की सरकार प्रधान ही चलाएंगे. इस संबंध में पंचायती राज विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंजूरी दे दी है. इसी के साथ उत्तर प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था के इतिहास में पहली बार नया सिस्टम लागू होने जा रहा हैं. पूर्व में इस तरह की व्यवस्था मध्य प्रदेश आदि राज्यों में देखी जा चुकी है.

दरअसल, ओबीसी आरक्षण की स्थिति तय नहीं हो पाने की वजह से उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए जा सके. अब ओबीसी आयोग का गठन होने के बाद भी जरूरी तैयारियां करने में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है. चूंकि 26 मई को पंचायतों का मौजूदा कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में सरकार ने आगामी चुनावों तक गांवों में विकास कार्य एवं अन्य व्यवस्थाओं के संचालन के लिए नई व्यवस्था दी है.

प्रशासक बनेंगे प्रधान

चूंकि प्रधानों का कार्यकाल कल खत्म हो रहा है. ऐसे में अब नई व्यवस्था के तहत उनकी भूमिका प्रशासक की होगी. इन प्रशासक के नेतृत्व में एक समिति होगी, जो विकास कार्यों का क्रियान्वयन करेगी. इस संबंध में हाल ही में पंचायती राज विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजा था. जिसे आज सीएम योगी ने आधिकारिक मंजूरी दी है. इस व्यवस्था के तहत पहले से चल रहे विकास कार्य तो जारी रहेंगे, आवश्यकता के मुताबिक नए काम भी शुरू कराए जा सकेंगे.

पहले क्या थी व्यवस्था?

उत्तर प्रदेश में पहले भी कई बार समय रहते चुनाव नहीं हो पाए. ऐसी परिस्थितियों में शासन द्वारा गांवों में तैनात एडीओ पंचायत या सचिव को गांवों का प्रशासक नियुक्त किया जाता रहा है. इन नियुक्तियों के साथ ही प्रधानों के सारे वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार छिन जाते थे. जबकि मध्य प्रदेश आदि राज्यों में ग्राम प्रधान को ही प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था रही है. सरकार ने इसी आधार पर पहली बार यूपी में प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी दी है.

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