सहारा सिटी पर नगर निगम की कार्रवाई वैध, HC का फैसला; नई विधानसभा बनने का रास्ता साफ

सहारा शहर प्रकरण में नगर निगम लखनऊ को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी जीत मिली है. हाईकोर्ट ने सहारा कमर्शियल की याचिका खारिज कर नगर निगम की कार्रवाई को वैध ठहराया. इस फैसले से जमीन का मालिकाना हक नगर निगम के पास रहेगा, जिससे यहां नई विधानसभा बनने का रास्ता साफ हो गया है.

सहारा शहर मामले में नगर निगम को बड़ी कानूनी जीत (फाइल फोटो) Image Credit:

लगभग 170 एकड़ में फैले सहारा शहर प्रकरण में नगर निगम लखनऊ को बड़ी राहत मिली है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सहारा कमर्शियल की ओर से कब्जा वापस लेने के लिए दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है. साथ ही, अदालत ने लीज शर्तों के उल्लंघन पर नगर निगम द्वारा की गई सीलिंग कार्रवाई को वैध ठहराया है.

सहारा समूह को गोमतीनगर में आवासीय योजना विकसित करने के नगर निगम ने 1994 में शर्तों के तहत 170 एकड़ जमीन दी थी. 30 वर्ष की लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी निर्धारित विकास कार्य नहीं किए गए थे. कई नोटिस देने के बाद निगम ने इसपर कब्जा कर लिया. यह वही जमीन है जहां पर यूपी का नया विधानभवन बनाने की तैयारी है.

HC ने माना नगर निगम की कार्रवाई वैध थी

नगर निगम का कहना था कि लीज के तहत निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया, साथ ही कई निर्माण एवं उपयोग नियमों का उल्लंघन पाया गया. जांच के बाद पूरे परिसर के छहों गेट सील कर दिए और प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. सहारा समूह ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और इसे मनमाना बताया था.

हालांकि, नगर निगम ने अदालत में स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की गई. निगम ने यह भी बताया कि वर्ष 2020 और 2025 में कई बार नोटिस जारी कर कंपनी को सुधार का अवसर दिया गया, लेकिन नियमों का पालन नहीं होने पर ही अंतिम कार्रवाई की गई. अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों के बाद पाया कि नगर निगम की कार्रवाई वैध थी.

यह फैसले नगर निगम के लिए बड़ी कानूनी जीत

इसी आधार पर अदालत ने सहारा की याचिका को खारिज कर दिया. इस फैसले को नगर निगम के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है. साथ ही स्पष्ट हो गया है कि 30 वर्ष की लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी निर्धारित विकास कार्य नहीं किए गए थे, जिससे प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े, अब यह कार्रवाई न्यायिक कसौटी पर खरी उतरी है.

इस पूरे प्रकरण में नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देशन में नगर निगम की ओर से सक्रिय भूमिका निभाई. पैनल अधिवक्ताओं के सहयोग से मजबूत कानूनी पक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसमें सभी आवश्यक दस्तावेज, नोटिस और प्रक्रियाओं का विस्तृत ब्यौरा अदालत के समक्ष रखा गया. इससे पहले सहारा शहर की याचिका सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो चुकी थी.

कुल 245 एकड़ में नया विधानभवन बनाने की तैयारी

नगर निगम ने पिछले साथ अक्टूबर में सहारा समूह को सील कर कब्जा लिया था. सहारा शहर का 170 एकड़ परिसर, सहारा समूह की अटैच की गई संपत्तियों में से एक है. इसी जमीन पर नया विधानभवन बनाने का भी प्रस्ताव है. इस परियोजना की डीपीआर और डिजाइन के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

बता दें कि, कुल 245 एकड़ नया विधानभवन बनाने की तैयारी है, इसमें गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की 170 एकड़ परिसर है, जो अब नगर निगम है अधीन है बांकि 75 एकड़ एलडीए के पास है. एलडीए को नोडल एजेंसी बनाया गया है, कंसल्टेंट नियुक्त करेगा और डीपीआर तैयार करने के काम को आगे बढ़ाएगा.

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