ईरान जंग: यूपी के सभी उद्योग पर असर, 40% तक घटा उत्पादन, रोजगार पर संकट
इजरायल अमेरिका का ईरान के साथ चल रहे जंग का असर यूपी के उद्योगों पर पड़ रहा है. औद्योगिक ईकाइयों का उत्पादन तकरीबन 40 प्रतिशत तक घट गया है. निर्यात में कमी आने के चलते रोजगार पर संकट गहरा गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द युद्ध नहीं रुका तो स्थितियां भयावह हो सकती हैं.
अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों पर दिखने लगा है. कच्चे माल की आपूर्ति रुकने, गैस संकट और निर्यात ऑर्डर ठप होने से प्रदेश के हजारों एमएसएमई इकाइयों का उत्पादन 30 से 40 प्रतिशत तक घट गया है. फैक्टरियों में शिफ्ट बंद हो रही हैं. माल गोदामों में फंसा हुआ है. नए ऑर्डर नहीं आ रहे. ऐसे में यूपी के पूर्व मुख्यसचिव अलोक रंजन का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आ सकता है.
कानपुर, आगरा, मुरादाबाद, अलीगढ़, फिरोजाबाद, बरेली समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हालात बिगड़ रहे हैं. खाड़ी सहयोग परिषद देशों, ईरान और इजरायल में निर्यात पूरी तरह प्रभावित हो गया है. कानपुर में ही 1200-1300 करोड़ रुपये का आयात फंस गया है, जबकि पूरे प्रदेश में 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का उत्पादन और व्यापार प्रभावित है.
कानपुर के ये उद्योग बुरी तरह प्रभावित
कानपुर के चमड़ा, कपड़ा, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक, पैकेजिंग और केमिकल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हैं. यहां 250 से ज्यादा चमड़ा इकाइयां हैं, जो सालाना 6 हजार करोड़ से ज्यादा का निर्यात करती हैं. कच्चे माल खासकर चमड़ा केमिकल की कीमतें आसमान छू रही हैं या बाजार में उपलब्ध ही नहीं हैं. प्लास्टिक दाना महंगा होने से डिटर्जेंट और पैकेजिंग सामग्री के दाम बढ़ गए हैं. उद्योग अब सिर्फ एक शिफ्ट में चल रहा है और कुल उत्पादन 30 प्रतिशत रह गया है.
आगरा-मथुरा मे कांच उद्योग की कमर टूटी
ताज ट्रेपेजियम जोन में 347 कांच, चूड़ी और फाउंड्री इकाइयां प्रभावित हैं. पहले 14 लाख घन मीटर गैस की आपूर्ति होती थी, लेकिन अब सब्सिडी वाली गैस में कटौती के बाद बाजार दर वाली 3 लाख घन मीटर गैस में 45 प्रतिशत कमी आ गई है. 40 रुपये प्रति घन मीटर मिलने वाली गैस अब 150 रुपये में मिल रही है. नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मनोज बंसल ने चेतावनी दी, यही हालात रहे तो फैक्टरियों में ताले लगने शुरू हो जाएंगे.
मुरादाबाद में स्तशिल्प उत्पादन ठप
मुरादाबाद में 100 से ज्यादा कारखानों में हस्तशिल्प उत्पादन ठप है. वेल्डिंग का काम बंद, 250 फैक्टरियों ने गैस आपूर्ति 20 प्रतिशत घटा दी है. एमएसएमई प्रेसिडेंट नावेद उर रहमान ने बताया कि ऑर्डर होल्ड कर दिए गए हैं. करीब 300 करोड़ रुपये के हस्तशिल्प उत्पाद प्रभावित हैं. यहां से सालाना 8-9 हजार करोड़ का निर्यात होता है.
अलीगढ़ में 2400 करोड़ की चोट
लॉक, हार्डवेयर और आर्टवेयर सेक्टर को 2400 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. 5 हजार एमएसएमई इकाइयों का उत्पादन प्रभावित है. इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष आलोक कुमार झा ने कहा कि इराक, ईरान, कुवैत, दुबई, सऊदी अरब और मिस्र को सप्लाई बंद होने से 1500 करोड़ का अतिरिक्त नुकसान हुआ है.
फिरोजाबाद में भी उद्योगों को भारी नुकसान
फिरोजाबाद मे आरएलएनजी गैस कटौती से 30 से ज्यादा निर्यातकों पर संकट में है. कांच के नाजुक हस्तशिल्प गोदामों में फंसे पड़े हैं. बरेली मे उत्पादन 40 प्रतिशत घट गया है. औद्योगिक पीएनजी महंगा साबित हो रहा है. रात की शिफ्ट बंद कर दी गई है. गत्ता, फूड प्रोसेसिंग, प्लाईवुड और प्रिंटिंग प्रेस जैसी इकाइयां ठप हो हई बै. पॉलीथीन 100 रुपये किलो महंगी हो गई.
प्रयागराज समेत प्रदेश के कई अन्य जिले भी प्रभावित
प्रयागराज झूंसी के इंडियन ऑयल प्लांट से घरेलू गैस सिलेंडर आपूर्ति आधी हो गई. उधर बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, मेरठ के उद्यगों को 600 करोड़ का घाटा हो चुका है. प्लास्टिक दाना का रेट दोगुना हो गया है. अगरबत्ती-माचिस-रिम निर्यात बंद हो चुके हैं. खेल उद्योग को 400 करोड़ का नुकसान हो चुका है.
व्यापार मण्डल ने सरकार से मदद की मांग की
उत्तर आदर्श व्यापार मण्डल के अध्यक्ष संजय गुप्ता का कहना है कि कच्चे तेल की अनिश्चितता, आयात महंगा होना और खाड़ी देशों में सप्लाई चेन बाधित होने से स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है. अगर युद्ध जल्द नहीं थमा तो छोटे-मध्यम उद्यमियों के सामने दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है. प्रदेश सरकार और केंद्र से उद्योगपति राहत पैकेज, गैस आपूर्ति बहाल करने और निर्यातकों को वित्तीय सहायता की मांग कर रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि युद्ध का असर यूपी के उद्योगों पर दिखने लगा है. आम आदमी तक महंगाई का असर पहुंचने लगा है. गैस की किल्ल्त की वजह से होटल व्यापारियों पर असर पड़ा है. होटल व्यापारियों के बारे में सरकार को सोचना चाहिए. साथ ही उनके यहां काम कर रहे कर्मचारियों के लिए भी सरकार को मदद देनी चाहिए, ताकि उनके जनजीवन पर ज्यादा फर्क ना पड़े.
पूर्व अधिकारी जेके त्रिपाठी ने क्या कहा?
इस मसले पर भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी जेके त्रिपाठी का कहना है कि हम 42 देशों से तेल ले रहे हैं. इस वजह से आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं आ रही है, लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो असरर जरूर पड़ेगा. अभी मौजूदा समय में कालाबाजारी से दिक्कत है. लेकिन अभी हमारे पास गैस की भी कोई खास कमी नहीं है. गैस का उत्पादन हम भी करते हैं, जिससे इसकी निर्भरता दूसरे देशों पर भी कम है.