कसमंडी किला विवाद: लाखन आर्मी को पुलिस ने रोका, शिव मंदिर में जलाभिषेक नहीं करने दिया

लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कला गांव में सावन के पहले सोमवार को प्रस्तावित जलाभिषेक कार्यक्रम को लेकर तनाव की स्थिति बन गई. लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी अपने समर्थकों के साथ शिव मंदिर पहुंचे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया. प्रशासन और संगठन के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत चली, जिसके बाद सूरज पासी ने प्रशासन की अपील मानते हुए दूसरे शिव मंदिर में जलाभिषेक किया.

इसी कसमंडी किला को लेकर विवाद Image Credit:

राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र स्थित कसमंडी कला गांव में सावन के पहले सोमवार को प्रस्तावित जलाभिषेक कार्यक्रम को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बन गई. लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ शिव मंदिर में जलाभिषेक और 108 गांवों की पवित्र मिट्टी अर्पित करने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें मंदिर से कुछ दूरी पहले बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया. करीब आधे घंटे तक प्रशासन और संगठन के पदाधिकारियों के बीच बातचीत चली.

इसके बाद प्रशासन की अपील मानते हुए सूरज पासी अपने समर्थकों के साथ वापस लौट गए और दूसरे शिव मंदिर में जलाभिषेक किया. संभावित विवाद को देखते हुए प्रशासन ने एक दिन पहले यानी रविवार से ही कसमंडी कला गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया था. रहीमाबाद, माल और मलिहाबाद थानों की पुलिस के साथ पीएसी के जवान, एसीपी, एडीसीपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर तैनात रहे. गांव के बाहर बैरिकेडिंग कर दी गई थी.

पुलिस और लाखन आर्मी के बीच हुई बातचीत

सोमवार दोपहर करीब 12:30 बजे सूरज पासी अपने समर्थकों के साथ गांव पहुंचे. पुलिस उन्हें सुरक्षा घेरे में लेकर आगे बढ़ी, लेकिन मंदिर से पहले लगी बैरिकेडिंग पर रोक दिया गया. बैरिकेडिंग पर कुछ देर तक पुलिस अधिकारियों और लाखन आर्मी के पदाधिकारियों के बीच बातचीत चली. इस दौरान संगठन के समर्थक महाराजा कंसा पासी अमर रहें और लाखन आर्मी जिंदाबाद के नारे लगाते रहे.

एसीपी बोले- प्रशासन की बात मानकर लौट गए

बातचीत के बाद प्रशासन ने सूरज पासी से अनुरोध किया कि विवादित स्थल पर जलाभिषेक न किया जाए. काफी देर तक चली वार्ता के बाद उन्होंने प्रशासन की अपील स्वीकार कर ली. मलिहाबाद के एसीपी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि सूरज पासी अपने समर्थकों के साथ आए थे. उन्हें समझाया गया कि जिस स्थान पर प्रशासन ने रोक लगाई है, वहां जलाभिषेक न करें. उन्होंने बताया कि सूरज पासी ने प्रशासन का सहयोग करने की बात कही.

क्या है पूरा विवाद?

कसमंडी कला गांव में एक प्राचीन किलेनुमा ढांचा और उसके पास स्थित शिव मंदिर को लेकर पिछले कुछ सालों से विवाद बना हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब चार साल पहले जमील अहमद उर्फ जॉनी नाम का एक मौलाना गांव आया था. आरोप है कि उसने पुराने ढांचे के पास एक मस्जिद का निर्माण कराया और वहीं मदरसा भी संचालित करने लगा. ग्रामीणों का यह भी दावा है कि उसने किलेनुमा ढांचे का भी उपयोग शुरू कर दिया.

गांव के लोगों का कहना है कि यह ऐतिहासिक ढांचा महाराजा कंसा पासी का किला है और इसी कारण गांव का नाम कसमंडी पड़ा. ग्रामीणों के अनुसार, मौलाना की गतिविधियों पर आपत्ति जताए जाने के बाद वह 21 मई को गांव छोड़कर चला गया.

108 गांवों की मिट्टी लेकर पहुंचे थे समर्थक

लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने पहले ही घोषणा की थी कि सावन के पहले सोमवार को संगठन के कार्यकर्ता 108 गांवों की पवित्र मिट्टी लेकर कसमंडी कला स्थित शिव मंदिर पहुंचेंगे. यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ मंदिर और कथित ऐतिहासिक किले का गंगाजल से शुद्धिकरण किया जाएगा. उन्होंने इस कार्यक्रम को समाज की आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा बताते हुए सभी राजनीतिक दलों के विधायकों से समर्थन की भी अपील की थी.

धर्मांतरण मामले में भी उठाई कार्रवाई की मांग

सूरज पासी ने मलिहाबाद क्षेत्र में नट समाज के बच्चों के कथित धर्मांतरण के मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है. उन्होंने संबंधित मौलाना की गिरफ्तारी और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की.

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