आंदोलन की राह पर क्यों चले KGMU के इंटर्न डॉक्टर? सामने आई ये वजह
केजीएमयू के इंटर्न डॉक्टरों ने मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है. उन्हें सिर्फ 12,000 रुपये मिलते हैं, जबकि अन्य राज्यों में यह कहीं अधिक है. कई मंत्रियों से मुलाकात और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के बावजूद कोई पहल न होने से नाराज डॉक्टर अब हड़ताल पर हैं. वे सम्मानजनक 30,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश में MBBS इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोत्तरी की मांग अब गहरा गई है. आज से लखनऊ में केजीएमयू में तैनात इंटर्न डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान कर दिया है. इन डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें मानदेय के रूप में महज 12 हजार रुपये मिलते हैं, जबकि अन्य प्रदेशों में सम्मानजनक मानदेय है. ऐसे में डॉक्टरों ने यूपी के भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों के लिए सम्मानजनक मानदेय तय करने की मांग की है.
इंटर्न डॉक्टरों द्वारा उपलब्ध कराए गए राज्यवार आंकड़ों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार यूपी में यह मानदेय महज 12,000 रुपये प्रति माहहै. जबकि झारखंड में 25000, ओडिशा 28050+ DA, पश्चिम बंगाल में 30000 से 40000 रुपये है. इसके अलावा अन्य सभी राज्यों में यूपी की तुलना में स्टाइपेंड ज्यादा है. जबकि इंटर्न डॉक्टर OPD, वार्ड, इमरजेंसी, नाइट ड्यूटी, मरीजों की मॉनिटरिंग, प्रक्रियाओं में सहायता, रिकॉर्ड एवं अन्य क्लिनिकल कार्य में अहम योगदान देते हैं.
सरकार तक पहुंचाई मांग
MBBS इंटर्न प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि स्टाइपेंड वृद्धि की मांग को लेकर वे अब तक प्रदेश के विभिन्न मंत्रियों एवं संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं. यहां तक कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष भी अपनी मांग रख चुके हैं. बावजूद इसके, अभी तक स्टाइपेंड में अपेक्षित वृद्धि की दिशा में कोई पहल नहीं हुई है. इन डॉक्टरों का कहना है कि वह अपनी मांगों को लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाते रहे हैं.
आज से अनिश्चितकालीन आंदोलन
सरकार की ओर से मांगों पर कोई पहल नहीं होने से नाराज MBBS इंटर्न ने आज से केजीएमयू में अनिश्चित कालीन आंदोलन का ऐलान किया है. इनका आज से KGMU के गेट नंबर 1/2 के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया. इनका कहना है कि आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल भी की जाएगी. यदि इसके बाद भी सरकार नहीं सुनेगी तो 1090 चौराहे पर भी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा.
आंदोलन के पीछे दी सफाई
इन डॉक्टरों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि अपने श्रम, जिम्मेदारियों और चिकित्सा सेवा के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड की मांग करना है. उनकी मांग है कि मानदेय कम से कम 30000 रुपये प्रति माह हो. उन्होंने सरकार से अपील की है कि उनका मुद्दा संवेदनशील है और इसपर जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए. जिससे डॉक्टर आंदोलन छोड़कर अपने काम पर लौट सकें.