दवा घोटाले की जांच के बीच KGMU के एक और डॉक्टर का इस्तीफा, लेटर में क्या-क्या लिखा?
KGMU में चल रहे विवादों के बीच शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. संतोष कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. करीब एक दशक से अधिक समय तक संगठन का नेतृत्व करने वाले डॉ. संतोष कुमार ने शिक्षकों की घटती भागीदारी, लंबित मांगों और संगठन की कमजोर होती सामूहिक शक्ति को अपने फैसले का कारण बताया है. यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब KGMU दवा और लेंस खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है.
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी KGMU में इन दिनों घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं. दवा और लेंस खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले में प्रोफेसर के निलंबन और जांच के बीच अब शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. संतोष कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि उन्होंने शिक्षकों की घटती भागीदारी और लंबित मांगों को इसकी वजह बताया है, लेकिन उनके इस्तीफे के समय को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
करीब एक दशक से अधिक समय तक KGMU शिक्षक संघ का नेतृत्व करने वाले डॉ. संतोष कुमार ने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है. शिक्षक संघ के अध्यक्ष को भेजे अपने पत्र में उन्होंने संगठन की कमजोर होती सामूहिक ताकत, शिक्षकों की घटती भागीदारी और लंबित मांगों को अपने फैसले की वजह बताया है. डॉ. संतोष कुमार ने अपने पत्र में लिखा है कि शिक्षक संघ ने वर्षों के संघर्ष के बाद शिक्षकों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं दिलाईं.
इनमें SGPGI के समान वेतन और भत्तों की व्यवस्था भी शामिल रही, लेकिन अब शिक्षकों की भागीदारी लगातार कम होती जा रही है, जिससे संगठन की प्रभावशीलता प्रभावित हुई है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि दिवंगत शिक्षकों के परिवारों की सहायता के लिए एक दिन का वेतन देने के फैसले में भी सहयोग घटता गया, जहां पहले लगभग 400 शिक्षकों ने योगदान दिया था, वहीं बाद के मामलों में यह संख्या घटकर 326 और फिर 211 तक पहुंच गई, जबकि विश्वविद्यालय में करीब 486 शिक्षक कार्यरत हैं.
अपने इस्तीफे में डॉ. संतोष कुमार ने अर्जित अवकाश, ग्रेच्युटी, कॉन्फ्रेंस भत्ता, प्रशासनिक पारदर्शिता और शिक्षकों के प्रार्थना-पत्रों के त्वरित निस्तारण जैसे कई मुद्दों का भी जिक्र किया. डॉ. संतोष कुमार का कहना है कि इन विषयों को कई बार प्रशासन और कुलपति के समक्ष उठाया गया, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिल सका. गौर करने वाली बात यह है कि यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब KGMU पहले से ही विवादों के केंद्र में है.
हाल ही में मुख्यमंत्री जनता दर्शन में पहुंची शिकायत के बाद नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजीव गुप्ता को निलंबित किया गया. जांच में कई मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं और लेंस खरीदने के लिए कहे जाने के आरोप सामने आए थे. प्रशासन ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की भी तैयारी शुरू कर दी है. इसी वजह से विश्वविद्यालय परिसर में अब इस इस्तीफे की टाइमिंग को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं.
हालांकि डॉ. संतोष कुमार ने अपने पत्र में किसी जांच या प्रशासनिक कार्रवाई का जिक्र नहीं किया है, लेकिन शिक्षक और कर्मचारी वर्ग इसे मौजूदा हालात से जोड़कर भी देख रहे हैं. डॉ. संतोष ने अपने पत्र में एक बड़ा सवाल भी उठाया है. उन्होंने लिखा कि कई शिक्षक उनसे पूछते हैं कि क्या शिक्षक संघ अब केवल स्वागत और विदाई समारोहों तक सीमित रह गया है. उन्होंने स्वीकार किया कि इस सवाल का उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है.
